छत्तीसगढ़ में विकास की नई सुबह: प्रधानमंत्री का संबोधन और विधानसभा का लोकार्पण

माननीय प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में नई विधानसभा भवन का लोकार्पण किया, जिसे उन्होंने राज्य की विकास यात्रा में स्वर्णिम शुरुआत बताया।

  • व्यक्तिगत संबंध: प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ से अपने दशकों पुराने आत्मीय नाता का ज़िक्र किया और कहा कि एक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने यहाँ बहुत समय बिताया और इस भूमि का आशीर्वाद उनके जीवन को गढ़ने में सहायक रहा। उन्होंने कहा कि वह छत्तीसगढ़ के निर्माण और परिवर्तन के साक्षी रहे हैं।
  • रजत जयंती और लोकार्पण: छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों की यात्रा के अहम पड़ाव पर, प्रधानमंत्री को राज्य के लोगों के लिए नई विधानसभा के लोकार्पण का सौभाग्य मिला। उन्होंने इसे जन-आकांक्षा, जन-संघर्ष और जन-गौरव का उत्सव बताया।
  • संविधान सभा के सदस्य: उन्होंने भारतीय गणतंत्र के अमृत वर्ष (2025) के संदर्भ में, संविधान सभा के सदस्य रहे रविशंकर शुक्ल जी, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जी जैसे मनीषियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • अटल जी का सपना: प्रधानमंत्री ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन किया, जिनकी दूरदृष्टि से वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। उन्होंने विधानसभा के साथ अटल जी की प्रतिमा के अनावरण को उनके सपने के साकार होने का प्रमाण बताया।
  • लोकतंत्र का तीर्थ स्थल: नए विधानसभा भवन को लोकतंत्र का तीर्थ स्थल बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक है, जहाँ लिए गए निर्णय दशकों तक राज्य के भाग्य को दिशा देंगे।
  • विरासत और संस्कृति: उन्होंने कहा कि यह भवन छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति का प्रतिबिंब है। इसमें बस्तर आर्ट की झलक है, साथ ही बाबा गुरु घासीदास जी का ‘मनखे-मनखे एक समान’ और माता शबरी की आत्मीयता का संदेश भी समाहित है।

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