परीक्षा पे चर्चा 2026: पीएम मोदी ने छात्रों को दिया सफलता का मंत्र; कहा- ‘पहले निडर बनें, फिर खुद बन जाएंगे लीडर’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने लोकप्रिय संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण (9th Edition) के दूसरे एपिसोड के माध्यम से देश के भविष्य यानी छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। कोयंबटूर से सीधे छत्तीसगढ़ और फिर वहां से गुवाहाटी के अष्टलक्ष्मी कार्यक्रम में शिरकत करते हुए, प्रधानमंत्री ने छात्रों के मन से परीक्षा का भय निकालने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पीएम मोदी ने आधुनिक युग में तकनीकी निर्भरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें कभी भी टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय, हमें अपनी क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीक का एक उपकरण के रूप में उपयोग करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को केवल पढ़ने तक सीमित न रहने बल्कि लिखकर अभ्यास करने की सलाह दी, ताकि स्मृति और एकाग्रता में सुधार हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी का इस बार का संबोधन मात्र परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे जीवन प्रबंधन (Life Management) से जोड़ दिया। उनके संबोधन की चार सबसे बड़ी बातें जो हर छात्र के लिए अनिवार्य हैं:
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पीयर लर्निंग (सहपाठियों की मदद): पीएम ने एक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया कि जब हम अपने कमजोर क्लासमेट्स की मदद करते हैं और उन्हें विषय समझाते हैं, तो हमारा अपना ज्ञान भी गहरा होता है। यह टीम भावना और दोस्ती को भी मजबूत करता है।
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तनाव प्रबंधन का ‘रिफ्लेक्शन’ फॉर्मूला: तनाव कम करने के लिए पीएम ने पुरानी परीक्षाओं के अनुभव को याद करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि जिस तरह पिछली परीक्षाओं का डर बाद में व्यर्थ लगा, वैसे ही वर्तमान परीक्षा भी बीत जाएगी। उन्होंने ‘राइटिंग प्रैक्टिस’ (लिखने का अभ्यास) को तनाव दूर करने की सबसे अचूक औषधि बताया।
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सतत जिज्ञासा (एक विद्यार्थी की नजर से यात्रा): उन्होंने वेकेशन और पर्यटन को भी शिक्षा का हिस्सा बताया। पीएम का मानना है कि चाहे आप अपनी तहसील में हों या राज्य से बाहर, एक छात्र की तरह जिज्ञासु नजरिया रखने से आपका ज्ञान निरंतर बढ़ता रहता है।
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लीडरशिप की शुरुआत स्वयं से: ‘पहले निडर बनो, फिर लीडर बनो’ के नारे के साथ उन्होंने समझाया कि नेतृत्व दूसरों पर हुक्म चलाने से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी उठाने से आता है। उन्होंने कचरा उठाने का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आप निडर होकर पहल करते हैं, तो लोग खुद-ब-खुद आपका अनुसरण करने लगते हैं।


