प्रधानमंत्री मोदी ने ‘M.A.N.A.V’ विजन फ्रेमवर्क से दुनिया को दिखाया भविष्य का रास्ता

नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन वैश्विक तकनीकी जगत के लिए एक दिशा-निर्देश बनकर उभरा है। पीएम ने स्पष्ट किया कि जहाँ दुनिया एआई से डर रही है, भारत इसे अपनी विकास यात्रा का ‘भाग्य’ और टर्निंग पॉइंट मान रहा है। प्रधानमंत्री के भाषण की पांच प्रमुख बातें इस प्रकार रहीं:

  • M.A.N.A.V (मानव) फ्रेमवर्क: पीएम ने एआई के लिए एक नैतिक और जवाबदेह वैश्विक ढांचा प्रस्तावित किया, जो नैतिक (Moral), जवाबदेह (Accountable), राष्ट्रीय संप्रभुता (National Sovereignty), सुलभ (Accessible) और वैध (Valid) हो।

  • डिजिटल ऑथेंटिसिटी: डीपफेक और भ्रमित करने वाली जानकारी से बचने के लिए उन्होंने कंटेंट पर स्पष्ट लेबलिंग की वकालत की।

  • ओपन सोर्स तकनीक: गोपनीयता की जगह पीएम ने एआई कोड को ‘ओपन शेयर’ करने का आह्वान किया ताकि युवा प्रतिभाएं इसे और सुरक्षित बना सकें।

  • रोजगार और मशीन का समन्वय: उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि इंसान और मशीन मिलकर सृजन करेंगे। इसके लिए उन्होंने ‘स्किलिंग और रिस्किलिंग’ को जन-आंदोलन बनाने की बात कही।

  • मानवता का कल्याण: एआई को केवल डेटा तक सीमित न रखकर इसे मानवीय मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया।

भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट के दौरान रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर पेश की। अंबानी ने तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह ‘जियो’ ने डेटा को सस्ता और सुलभ बनाया, ठीक उसी तरह रिलायंस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी हर भारतीय के लिए किफायती बनाएगा। इसके लिए रिलायंस अगले सात सालों में 10 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करेगा।

अंबानी ने एआई की तुलना आधुनिक ‘अक्षय पात्र’ से करते हुए कहा कि यह तकनीक हर यंत्र को स्मार्ट बनाएगी और उच्च-कौशल वाले रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। इस ऐतिहासिक समिट में आज वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का संगम देखने को मिला। गूगल के सुंदर पिचाई और ओपन एआई के सैम ऑल्टमैन ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा किया। समिट में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक एआई विमर्श का केंद्र बन चुका है।

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