वैश्विक तनाव के बीच भारत-नॉर्वे सहयोग बेहद महत्वपूर्ण, कूटनीति और तकनीक के दुरुपयोग के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान: पीएम योनस गौर स्टोरा

नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनस गौर स्टोरा ने सोमवार को ओस्लो में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संरक्षणवाद के कारण भारत तथा नॉर्वे के बीच आपसी सहयोग की प्रासंगिकता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने वैश्विक स्थिरता के लिए नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत की और कूटनीति, व्यापार तथा तकनीक को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाली प्रवृत्तियों के खिलाफ दोनों देशों को एकजुट होने की जरूरत बताई।
संयुक्त प्रेस वार्ता में वैश्विक अनिश्चितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया इस समय बेहद संवेदनशील और बदलाव के दौर से गुजर रही है। उनका मानना था कि जो ताकतें व्यापार, तकनीक और कूटनीतिक मंचों का गलत फायदा उठाकर उन्हें एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं, उनके सामने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मजबूती से खड़ा होना होगा। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में स्थापित वैश्विक नियमों का समर्थन करना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है।
इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों राजनेताओं ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री योनस गौर ने बताया कि बातचीत के दौरान यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने इन वैश्विक चुनौतियों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत और नॉर्वे के राजनयिकों के बीच जारी सीधे और निरंतर संवाद की सराहना की और इसे बेहद आवश्यक कदम बताया।
दोनों देशों के वैचारिक दृष्टिकोण पर बात करते हुए नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग प्राथमिकताओं के कारण हर मुद्दे पर दोनों पक्षों की राय एक जैसी होना जरूरी नहीं है। इसके बावजूद, भारत और नॉर्वे मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हैं और आपसी मतभेदों को हमेशा सम्मानजनक बातचीत के जरिए सुलझाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में अलगाववाद या एकतरफा फैसलों के मुकाबले आपसी सहयोग ही सबसे बेहतर परिणाम दे सकता है।
उन्होंने समान लोकतांत्रिक सिद्धांतों और साझा मूल्यों वाले देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के मुकाबले आपसी मतभेद बहुत छोटे हैं, इसलिए सहयोग की भावना को बढ़ावा देना समय की मांग है। प्रधानमंत्री स्टोरा ने पीएम मोदी की इस ओस्लो यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ते तालमेल और साझा महत्वाकांक्षाओं का एक बड़ा प्रतीक करार दिया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद दोनों देश मिलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
इस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘ग्रीन रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपग्रेड करने की घोषणा की। नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा कि हरित परिवर्तन (ग्रीन ट्रांजिशन) के लक्ष्य को पाने के लिए दोनों राष्ट्र ज्ञान, आधुनिक संसाधनों और अपनी महत्वाकांक्षाओं के आधार पर एक मजबूत ढांचा तैयार कर रहे हैं। इस दिशा में तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दोनों ही पक्ष पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इस यात्रा के दौरान होने वाले समझौते इस साझेदारी को एक नई दिशा प्रदान करेंगे।



