ब्रिक्स न्याय मंत्रियों का साझा संकल्प: मध्यस्थता और संस्थागत सुधारों के जरिए सुदृढ़ होगी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली

गुजरात के गांधीनगर में 21 मई 2026 को ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्यस्थता और पंचनिर्णय के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के जरिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को सुदृढ़ करने संबंधी घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के तहत केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग ने इस निर्णय की आधिकारिक घोषणा की है, जो सदस्य देशों के बीच न्यायिक सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस स्वीकृत घोषणापत्र की नींव 19-20 मई 2026 को गांधीनगर में हुई वरिष्ठ अधिकारियों की दो दिवसीय बैठक में रखी गई थी, जहां इसके मसौदे को अंतिम रूप दिया गया। यह दस्तावेज मुख्य रूप से सदस्य राष्ट्रों के बीच आपसी विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और सर्वसुलभ बनाने की प्रतिबद्धता दर्शाता है। इस सम्मेलन में भारत सहित ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों—रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्रियों व वरिष्ठ राजनयिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

घोषणापत्र के प्रमुख बिंदुओं के अनुसार, कानूनी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न हितधारकों की कार्यक्षमता को उन्नत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए सरकारी विधिक अधिकारियों, जजों, वकीलों और मध्यस्थता करने वाले विशेषज्ञों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही, एडीआर (Alternative Dispute Resolution) की पूरी प्रक्रिया को ज्यादा सुगम, पारदर्शी और कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संस्थागत और संरचनात्मक सुधारों को गति देने की बात कही गई है।

न्यायिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से इस समझौते में डिजिटल टूल्स और तकनीकी नवाचारों के समावेश की वकालत की गई है। सभी ब्रिक्स देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि विवाद समाधान की दिशा में अपनाई जाने वाली सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों का आदान-प्रदान किया जाएगा और ज्ञान को साझा करने के लिए आपसी सहयोग को और अधिक गहरा किया जाएगा।

सदस्य देशों का मानना है कि मध्यस्थता और पंचनिर्णय को विवाद सुलझाने के सबसे पसंदीदा और प्राथमिक विकल्प के रूप में स्थापित किया जाना समय की मांग है। ऐसा होने से न केवल पारंपरिक न्यायालयों में लंबित मुकदमों का बोझ घटेगा, बल्कि वाणिज्यिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए एक स्थिर तथा भरोसा पैदा करने वाला वातावरण भी तैयार होगा।

इस संबंध में विधि कार्य विभाग ने स्पष्ट किया कि घोषणापत्र में तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का सिलसिला जारी रहेगा। विभाग ने उम्मीद जताई है कि इस साझा विजन के परिणामस्वरूप भविष्य में संस्थागत सुधारों और कौशल विकास से जुड़ी कई दूरगामी और सहयोगात्मक योजनाएं आकार लेंगी।

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