पूर्वोत्तर के सुनहरे रेशम को मिलेगा ग्लोबल लक्जरी ब्रांड का दर्जा, ‘मिशन सेनेहजोरी’ का हुआ आगाज

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को गुवाहाटी में ‘मिशन सेनेहजोरी’ नामक एक महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दिखाई। इस रणनीतिक पहल का लक्ष्य असम के पारंपरिक मुगा रेशम उद्योग को पुनर्जीवित कर उसे वैश्विक लक्जरी वस्त्र बाजार के अनुकूल बनाना और निर्यात उन्मुख इकोसिस्टम में तब्दील करना है।

लॉन्च के दौरान केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर के दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि असम का मुगा रेशम महज एक परिधान न होकर भारत की सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है, जिसे अब विश्वस्तरीय लक्जरी ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

इस वृहद मिशन को सफल बनाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, केंद्रीय रेशम बोर्ड, कपड़ा मंत्रालय और असम सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। योजना के तहत कताई, बुनाई, पौधों के रोपण, रेशमकीट बीज के उत्पादन, ब्रांडिंग और वैश्विक विपणन सहित पूरे सिल्क नेटवर्क को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा।

विदित हो कि मुगा रेशम अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यह देश का पहला ऐसा रेशम है जिसे जीआई टैग मिला था। राज्य के करीब 2.6 लाख बुनकर और रेशम पालक परिवार इस उद्योग पर निर्भर हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इसकी साख के अनुरूप स्थानीय उत्पादकों को अब तक इसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल सका है, जिसे दूर करने का प्रयास यह मिशन करेगा।

कार्ययोजना के अनुसार, इस मिशन को जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची जैसे मुगा बहुल जिलों में क्लस्टर आधारित मॉडल पर लागू किया जाएगा। यहां साझा सुविधा केंद्रों का निर्माण, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का सुदृढ़ीकरण और वैश्विक व्यापारिक पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

वित्तीय निवेश की बात करें तो अगले तीन सालों में इस मिशन के अंतर्गत तकरीबन 396 से 411 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। सिंधिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में रेशम पालकों की वार्षिक कमाई केवल 18,000 से 21,000 रुपए के आसपास है। इस नई व्यवस्था का मुख्य ध्येय बिचौलियों को हटाकर मुगा सिल्क का वास्तविक प्रीमियम मूल्य सीधे वास्तविक बुनकरों के खातों तक पहुंचाना है।

परियोजना के तहत वर्ष 2028 तक कई महत्वपूर्ण बुनियादी लक्ष्य तय किए गए हैं, जिसमें 5 आधुनिक मुगा रीलिंग इकाइयां, एक स्पन मिल, 30 एफपीओ और 1,180 किसान हित समूहों की स्थापना शामिल है। इसके अलावा 5,000 हेक्टेयर भूमि पर पौधों का कायाकल्प किया जाएगा, 80% से अधिक उत्पादों का जीआई प्रमाणीकरण होगा और 8,000 परिवारों को डिजिटल ट्रेसबिलिटी से जोड़कर सालाना निर्यात क्षमता को 2,000 किलोग्राम से ऊपर पहुंचाया जाएगा।

इसके साथ ही, राज्य को सिल्क हेरिटेज टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ‘मुगा सिल्क ट्रेल’, समर्पित सिल्क टूरिज्म पार्क और हर साल मुगा उत्सव आयोजित करने का भी प्रावधान है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पूरी कवायद को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मिशन न केवल असम की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखेगा, बल्कि स्थानीय बुनकरों, किसानों और युवा उद्यमियों के आर्थिक सशक्तिकरण का जरिया बनेगा।

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