द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई देने पर भारत और स्लोवाकिया सहमत, रक्षा सहयोग और श्रम प्रवासन पर हुए बड़े समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा की यात्रा के दौरान भारत और स्लोवाकिया ने अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी के रूप में अपग्रेड करने का बड़ा फैसला किया है। फ्रांस की यात्रा पूरी कर ब्रातिस्लावा पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का ब्रातिस्लावा कैसल में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं के बीच व्यापार, रक्षा, नवाचार और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर गहन चर्चा हुई। इस उच्चस्तरीय वार्ता में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और अतिरिक्त सचिव पूजा कपूर भी भारतीय दल के हिस्से के रूप में मौजूद रहे।
इस बैठक का एक मुख्य आकर्षण रक्षा क्षेत्र में हुआ नया समझौता रहा, जिसके तहत दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए एक आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के गहरे रणनीतिक सामंजस्य और भरोसे का परिचायक बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि इस कदम से दोनों देशों के सैन्य और रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन गतिविधियों को एक नई गति और मजबूती मिलेगी, जो दोनों देशों के विकास के लिए आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर बात करते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने वैश्विक संस्थाओं के ढांचे में बदलाव की पुरजोर वकालत की। पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान दौर की वास्तविकताओं और चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक निकायों को खुद को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। उन्होंने शांति का संदेश देते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में चल रहे विवादों का हल केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही संभव है और भारत-स्लोवाकिया इस दिशा में वैश्विक स्तर पर अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दोनों देशों के बीच जन-सामान्य के संबंधों और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से पेशेवरों और कुशल कामगारों के लिए श्रम प्रवासन (लेबर माइग्रेशन) से संबंधित एक समझौता ज्ञापन की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त, सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक आगामी समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की बात कही गई। सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्लोवाक भाषा में भारतीय उपनिषदों का अनुवाद दोनों देशों के बीच की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक निकटता का एक बेहतरीन प्रमाण है। उन्होंने स्लोवाकिया की प्रगति में वहां रह रहे भारतीय समुदाय की भूमिका को भी सराहा।
इस ऐतिहासिक बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाक प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को भारत यात्रा पर आने का सादर आमंत्रण दिया। 140 करोड़ भारतीयों की ओर से दिए गए इस निमंत्रण को स्लोवाक प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किए जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर की। पीएम मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह व्यापक साझेदारी भविष्य में दोनों देशों के लिए समृद्धि के नए अवसरों की आधारशिला बनेगी। आपको बता दें कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ रही नजदीकियों का हिस्सा है, जिससे पहले वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु स्लोवाकिया गई थीं और इसी साल स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने भी भारत का दौरा किया था। इस दौरान साइबर सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।



