भारतीय इकोनॉमी के सर्विस सेक्टर की मासिक ट्रैकिंग के लिए जुलाई में लॉन्च होगा नया प्रोडक्शन इंडेक्स
केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत जुलाई 2026 से देश में ‘इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन’ (आईएसपी) लागू कर दिया जाएगा। इस मासिक सूचकांक के जरिए संगठित सेवा क्षेत्र की विकास दर में होने वाले तात्कालिक बदलावों को मापा जाएगा। मंत्रालय ने इस पूरी प्रक्रिया को आसानी से समझाने के लिए एक आधिकारिक दिशा-निर्देश और प्रश्न-पुस्तिका (FAQ) भी जारी की है।
मंत्रालय द्वारा जारी की गई इस प्रश्न-पुस्तिका के अनुसार, आईएसपी को एक शॉर्ट-टर्म इंडिकेटर के रूप में विकसित किया गया है। यह सूचकांक किसी एक निर्धारित आधार वर्ष की तुलना में देश के सेवा क्षेत्र के उत्पादन में होने वाले समयबद्ध परिवर्तनों की गणना करेगा। इसके माध्यम से सेवा उद्योग के वास्तविक उत्पादन (रियल आउटपुट) में आने वाले बदलावों को ट्रैक किया जाएगा।
कार्यप्रणाली के स्तर पर यह सूचकांक ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे वर्तमान में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) करता है, मगर इसका दायरा केवल औपचारिक सेवा क्षेत्र तक सीमित रहेगा। मासिक आधार पर आंकड़े सामने आने से इस सेक्टर की परफॉर्मेंस की नियमित और तेज जानकारी मिल सकेगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2013-14 से ही भारत के ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी आधी से अधिक यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा रही है, जो इसे अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनाती है।
इस क्षेत्र के लगातार बढ़ते दायरे और अंतरराष्ट्रीय मानकों को देखते हुए देश में एक ऐसे सिस्टम की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो इसकी ग्रोथ को लगातार माप सके। इन आंकड़ों के आने के बाद आर्थिक नीतियां बनाने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों को समय पर जरूरी फैसले लेने तथा सर्विस सेक्टर की प्रगति की दिशा तय करने में आसानी होगी।
मंत्रालय का कहना है कि इस सूचकांक का एक मुख्य लक्ष्य आईआईपी के पूरक के तौर पर एक नया आर्थिक पैमाना तैयार करना है, ताकि देश की अल्पकालिक आर्थिक चाल को बेहतर ढंग से समझा जा सके। इसके अलावा, हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा मिलने से भारत का मौजूदा सांख्यिकीय ढांचा और मजबूत होगा, जिसका सीधा फायदा आर्थिक समीक्षाओं को मिलेगा।
आगे चलकर यह सूचकांक सेवा क्षेत्र के उद्योगों की कार्यप्रणाली की समय पर रिपोर्ट देगा, जिससे आर्थिक मोर्चे पर निगरानी मजबूत होगी और डेटा आधारित नीतियां बनाई जा सकेंगी। इसके टाइम-सीरीज डेटा की मदद से आने वाले समय में देश के व्यापारिक चक्र और आर्थिक पूर्वानुमानों का मूल्यांकन करना बेहद सरल हो जाएगा।



