भारत-जापान के बीच ऐतिहासिक हरित ईंधन समझौता, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मिली बड़ी कामयाबी

नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में भारत के एसीएमई ग्रुप ने जापान की दो प्रमुख कंपनियों के साथ हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत यह देश का अब तक का सबसे बड़ा निर्यात-उन्मुख समझौता माना जा रहा है। इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आईएचआई कॉर्पोरेशन और मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी (एमजीसी) के साथ विस्तृत रूपरेखा साझा की गई।

भारत सरकार ने देश को स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से जनवरी 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के बजट के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन के प्रभावी संचालन के लिए ‘स्ट्रैटेजिक इंटरवेंशंस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन’ (SIGHT) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत भारतीय सौर ऊर्जा निगम पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है। इसी योजना के तहत एसीएमई ग्रुप को सालाना 3.70 लाख टन हरित ईंधन उत्पादन की क्षमता मिली है, जो इस निर्यात सौदे का मुख्य आधार है।

जापानी कंपनी आईएचआई कॉर्पोरेशन के साथ हुए करार के मुताबिक, एसीएमई समूह हर साल 4.05 लाख टन हरित अमोनिया की आपूर्ति जापान को करेगा। इस परियोजना को वित्तीय स्थिरता देने के लिए जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (METI) की ‘कॉन्ट्रेक्ट फॉर डिफरेंस’ (CFD) योजना का सहयोग मिला है। यह सरकारी नीति जापानी आयातकों को मूल्य सहायता देकर इस तरह के बड़े समझौतों को व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक और सुरक्षित बनाती है।

इसके साथ ही, एसीएमई ग्रुप ने मित्सुबिशी गैस केमिकल कंपनी (एमजीसी) के साथ भी 10 वर्ष की अवधि के लिए एक बड़ा अनुबंध किया है। इस समझौते के अंतर्गत ओडिशा के पारादीप संयंत्र से प्रति वर्ष एक लाख टन हरित मेथनॉल की खेप जापान भेजी जाएगी। वैश्विक पर्यावरण मानकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह परियोजना विशेष रूप से समुद्री परिवहन क्षेत्र में कार्बन कटौती में मददगार साबित होगी, जो यूरोपीय नियमों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के क्लीन फ्यूल मानकों को पूरी तरह पूरा करती है।

इस रणनीतिक उपलब्धि पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जापान सरकार द्वारा हमारी हरित ऊर्जा परियोजना के लिए सीएफडी सब्सिडी का समर्थन देना भारतीय इकोसिस्टम में दुनिया के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश का हरित हाइड्रोजन ढांचा बेहद मजबूत हो रहा है, जिससे वैश्विक निवेश के नए रास्ते खुल रहे हैं और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहा है।

मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने भी इस कदम को भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार, इन समझौतों से जापान जैसे बड़े बाजार के साथ हमारा सीधा संपर्क स्थापित हुआ है, जिससे इस क्षेत्र के निवेशकों का मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इससे भारत वैश्विक बाजार में एक भरोसेमंद स्वच्छ ईंधन प्रदाता के रूप में उभरेगा और अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ होगी। जापान के उप-मंत्री ताकेहिको मात्सुओ ने भी इसे दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण लक्ष्यों के लिए एक मील का पत्थर करार दिया।

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