अमरनाथ तीर्थयात्रा: तीन दिन के भीतर श्रद्धालुओं का आंकड़ा 56 हजार पार, अपंजीकृत यात्रियों के लिए नई गाइडलाइन जारी

जम्मू-कश्मीर में 3 जुलाई से अधिकारिक तौर पर शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। महज तीन दिनों के भीतर 56,000 से ज्यादा भक्तों ने पवित्र गुफा के भीतर हिमलिंग के दर्शन कर लिए हैं। यात्रा के तीसरे दिन, रविवार को देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 24,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 3880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस पावन स्थल पर अपनी हाजिरी लगाई। रविवार शाम को नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, बालटाल और पहलगाम-चंदनवाड़ी दोनों ही ट्रैकों से कुल 24,648 यात्रियों ने पवित्र गुफा में दर्शन लाभ लिया।
इससे पहले, शुक्रवार को यात्रा शुरू होने के बाद शुरुआती दो दिनों में गुफा मंदिर में 32,313 तीर्थयात्रियों ने शीश नवाया था। इन आंकड़ों को मिलाकर पहले तीन दिनों में दर्शन करने वाले कुल श्रद्धालुओं की संख्या 56,961 दर्ज की गई है। रविवार को पवित्र गुफा के आसपास के क्षेत्र में मौसम आंशिक रूप से मेघाच्छन्न रहा, लेकिन दोनों ही मार्गों पर यात्रा की गति सामान्य रही और कोई व्यवधान नहीं आया। दिनभर दर्शन करने के बाद तीर्थयात्री शाम होने तक अपने निर्धारित शिविरों में सुरक्षित लौट आए।
वर्तमान में बालटाल और नुनवान के मुख्य आधार शिविरों (बेस कैंप) से लेकर पवित्र गुफा तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद है। हालांकि प्रशासन ने पूर्व में यह एडवाइजरी जारी की थी कि श्रद्धालु अपनी निर्धारित तिथि से पहले दर्शन के लिए न निकलें, लेकिन इसके बाद भी दोनों बेस कैंपों में प्रतिदिन हजारों नए यात्री पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि यह यात्रा गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे छोटे बालटाल मार्ग और अनंतनाग जिले के 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग से समानांतर रूप से चल रही है, जो रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा के दिन संपन्न होगी।
अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अपंजीकृत श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपनी यात्रा योजना को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दें, क्योंकि 9 जुलाई तक के सभी पंजीकरण स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं। अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि रविवार से केवल उन्हीं यात्रियों को कश्मीर घाटी की ओर बढ़ने दिया जाएगा जो पहले से पंजीकृत हैं। बिना पंजीकरण के पहुंचे श्रद्धालुओं को नया कोटा जारी होने तक तय चौकियों पर रोका जा रहा है ताकि मार्ग पर व्यवस्था बनी रहे।
इस बीच, जम्मू शहर में भी तीर्थयात्रियों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। तवी नदी के किनारे, पुरानी मंडी, राम मंदिर और गीता भवन के समीप स्थापित किए गए पंजीकरण और टोकन वितरण काउंटरों पर सुबह से ही पैर रखने की जगह नहीं है। सोमवार की सुबह इन केंद्रों पर यात्रियों की बेहद लंबी कतारें देखी गईं। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न आगामी तारीखों के लिए 5,000 से अधिक अपंजीकृत यात्रियों का नया पंजीकरण पूरा किया गया है।
यात्रा मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। रामबन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल जी जादू ने बताया कि अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए रामबन स्वास्थ्य विभाग ने पुख्ता तैयारियां की हैं। पूरे यात्रा रूट पर 16 चिकित्सा दल तैनात किए गए हैं जो अलग-अलग पड़ावों और ट्रांजिट सेंटरों पर तैनात हैं। चंदरकोट यात्री निवास और लैंबर यात्रा कैंप ग्राउंड जैसी दो महत्वपूर्ण जगहों पर मिनी-हॉस्पिटल संचालित किए जा रहे हैं।
डॉ. जादू ने आगे बताया कि इन दोनों मिनी-अस्पतालों में चार-चार बिस्तरों की व्यवस्था है। यहां हृदय संबंधी जांच के लिए ईसीजी, अस्थमा के मरीजों की राहत के लिए नेबुलाइज़र और कार्डियक मॉनिटर जैसी अत्याधुनिक जीवन रक्षक प्रणालियां चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। किसी भी आपात स्थिति का सामना करने और पूरे मार्ग पर त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए कुल 75 स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसमें 20 अनुभवी डॉक्टर और 50 पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल हैं।



