मानसून की रफ्तार हुई तेज: दिल्ली-NCR और पूर्वोत्तर समेत अधिकांश राज्यों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान

देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी दिनों के लिए देशव्यापी अलर्ट जारी किया है। मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम, मध्य भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में आने वाले दिनों में जोरदार बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।

मौसम विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 8 जुलाई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के इलाकों में अत्यधिक तेज वर्षा होने की उम्मीद है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और कर्नाटक के तटीय व दक्षिणी आंतरिक हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों, बिहार, विदर्भ, पश्चिमी राजस्थान, सौराष्ट्र-कच्छ, केरल और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में भी मौसम खराब रहने के आसार हैं। पूर्वोत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका है।

अधिकारियों ने बताया कि मानसूनी हवाएं अब गुजरात के बचे हुए हिस्सों, राजस्थान और हरियाणा के अतिरिक्त क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी हैं। मौसम विभाग का मानना है कि उत्तर-पश्चिम भारत के जो हिस्से अभी बचे हुए हैं, वहां भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम प्रणाली पूरी तरह मददगार साबित हो रही है।

लगातार हो रही वर्षा के कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आ रही हैं। हरियाणा के गुरुग्राम में एनएच-48 (नरसिंहपुर क्षेत्र) की सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं उत्तराखंड में यमुनोत्री नेशनल हाईवे (NH-134) पर पहाड़ से मलबा गिरने के कारण रास्ता बंद करना पड़ा, जिसे खोलने के लिए राहत कार्य शुरू कर दिया गया है।

मौसम की इस स्थिति को देखते हुए नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जलजमाव वाले रास्तों और कमजोर बुनियादी ढांचे वाली इमारतों से दूरी बनाकर रखें। यात्रा के दौरान कम दृश्यता, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी स्थितियों के प्रति सतर्क रहें और केवल प्रमाणित ट्रैफिक रूट का ही पालन करें।

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