बाबा बर्फानी के दर्शनार्थियों का आंकड़ा 1.60 लाख के पार, 8,796 तीर्थयात्रियों का नौवां जत्था कश्मीर घाटी के लिए रवाना

जम्मू-कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा की वार्षिक यात्रा सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। 3 जुलाई 2026 से आरंभ हुई इस यात्रा के शुरुआती दिनों में ही अब तक 1.60 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से 8,796 श्रद्धालुओं का नौवां जत्था घाटी स्थित आधार शिविरों के लिए रवाना हुआ।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार तड़के सुरक्षा बलों के कड़े पहरे में दो अलग-अलग काफिलों के रूप में श्रद्धालुओं को रवाना किया गया। पहला काफिला सुबह 2:42 बजे 3,350 यात्रियों को लेकर बालटाल बेस कैंप की ओर बढ़ा। वहीं, दूसरा काफिला सुबह 3:24 बजे 5,346 यात्रियों के साथ नुनवान बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे में कुल मिलाकर 6,426 पुरुष, 2,042 महिलाएं, 228 साधु, 10 बच्चे और भारत के बाहर से आए 33 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

यात्रियों के परिवहन के लिए कुल 354 वाहनों के बेड़े का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 175 बसें, 70 मध्यम वाहन, 106 हल्के वाहन और 3 दोपहिया वाहन शामिल थे। रूट योजना के तहत बालटाल मार्ग के लिए 173 वाहन और पहलगाम मार्ग के लिए 181 वाहन आवंटित किए गए थे, ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

समीक्षा व्यवस्थाओं के अंतर्गत, केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को श्रीनगर के बाहरी इलाके में स्थित पंथा चौक यात्री शिविर का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती हफ्ते के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालु अमरनाथ जी के दर्शन के लिए आ रहे हैं। यह बढ़ता रुझान जहां हमारी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक जड़ों को मजबूती देता है, वहीं राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र को भी एक नया संबल प्रदान कर रहा है।

स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देशव्यापी स्तर पर पहुंचने चाहिए। जब तीर्थयात्री इन उत्पादों को अपने साथ ले जाएंगे, तो इससे स्थानीय शिल्पकारों को सम्मान मिलेगा और ‘एक जिला एक उत्पाद’ की भावना सुदृढ़ होगी, जो आस्था और समृद्धि का एक बेहतर संगम है। उन्होंने यात्रा प्रबंधन में शामिल श्राइन बोर्ड, पुलिस, नागरिक प्रशासन और सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता को सराहा तथा यात्रा के सफल संचालन के लिए निरंतर संवाद और सतर्कता बनाए रखने की हिदायत दी।

गौरतलब है कि 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा की यात्रा के लिए दो मार्ग उपलब्ध हैं। पारंपरिक पहलगाम मार्ग से जाने वाले श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पहुंचने में चार दिन का समय लगता है, जबकि बालटाल के छोटे रास्ते का उपयोग करने वाले श्रद्धालु दर्शन करके उसी दिन अपने बेस कैंप वापस आ सकते हैं। इस वर्ष की यह धार्मिक यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहार के दिन संपन्न होगी।

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