तटीय सुरक्षा होगी और मजबूत: गृह मंत्री अमित शाह ने पत्तन सुरक्षा ब्यूरो की प्रगति पर की उच्च स्तरीय बैठक, जारी किए अहम दिशा-निर्देश

भारत सरकार ने देश की समुद्री सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करने की दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की सह-अध्यक्षता में पत्तन सुरक्षा ब्यूरो (BoPS) के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में देश के शीर्ष सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए, जिनमें गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के प्रमुख, सीमा प्रबंधन सचिव और सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रमुख थे। समीक्षा के दौरान गृह मंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश की तटीय सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसे पूरी तरह अभेद्य बनाया जाएगा।
ब्यूरो के संचालन को गति देने के लिए गृह मंत्री ने मैनपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर के सटीक प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को आदेश दिया कि पत्तन सुरक्षा ब्यूरो के तहत तैनात होने वाले प्रत्येक सुरक्षाकर्मी की पूरी जानकारी वाला एक व्यापक डेटाबेस अविलंब तैयार किया जाए। प्रशिक्षण प्रक्रिया को तेज करने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि पत्तन सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान (PSTI) के पास उपलब्ध वर्तमान सुविधाओं का लाभ उठाते हुए सुरक्षाबलों की ट्रेनिंग तुरंत शुरू की जाए। इसके अलावा, जिन पोर्ट्स को सुरक्षा घेरे में लिया जा रहा है, वहां आयात-निर्यात होने वाले कंटेनरों की सघन जांच के लिए आधुनिक स्कैनर लगाने के भी निर्देश दिए गए।
सुरक्षा के मोर्चे पर निजी और सरकारी एजेंसियों के समन्वय को लेकर गृह मंत्री ने अहम गाइडलाइंस जारी कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोर्ट परिसरों में केवल प्रमाणित और लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा कंपनियों की सेवाएं ली जाएं, बशर्ते उनके सुरक्षाकर्मियों को सीआईएसएफ से समुचित प्रशिक्षण प्राप्त हुआ हो। व्यवस्था को त्रुटिहीन बनाने के इरादे से उन्होंने सीआईएसएफ को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वे विशाखापत्तनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाहों का दौरा करें। वहां जाकर बल को पत्तन सुरक्षा ब्यूरो के आगामी सुरक्षा मॉडल का व्यावहारिक परीक्षण (ट्रायल) करने को कहा गया है ताकि किसी भी कमी को समय रहते सुधारा जा सके।
नियामक ऊंचाइयों को छूने के लिए पत्तन सुरक्षा ब्यूरो (BoPS) को मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 की धारा 13 के वैधानिक प्रावधानों के तहत एक स्वायत्त कानूनी निकाय का रूप दिया जा रहा है। एक महानिदेशक के अधीन संचालित होने वाली यह संस्था सीधे पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के तहत अपनी सेवाएं देगी। इस ब्यूरो का मुख्य कार्य जहाजों और बंदरगाहों की सुरक्षा से जुड़े विनियामक ढांचे को लागू करना और नियमित निरीक्षण करना होगा। यह संस्था न केवल सुरक्षा इनपुट्स के एकत्रीकरण और विश्लेषण का केंद्र होगी, बल्कि उभरते डिजिटल खतरों को देखते हुए बंदरगाहों की आईटी अवसंरचना को सुरक्षित रखने के लिए एक समर्पित साइबर सुरक्षा प्रभाग का भी संचालन करेगी।
समुद्री सुरक्षा के एक अन्य संवेदनशील पहलू पर विचार करते हुए अमित शाह ने मत्स्यपालन विभाग के आला अफसरों संग अलग से बैठक की। इस दौरान उन्होंने फिशिंग हार्बर्स और फिश लैंडिंग सेंटर्स की सुरक्षा स्थिति की गहन समीक्षा की। गृह मंत्री ने इसरो (ISRO) द्वारा निर्मित ‘नभमित्र’ ऐप की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मछुआरों के बीच इसका व्यापक प्रसार किया जाए ताकि वे इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने देश के तटीय जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सभी फिश लैंडिंग केंद्रों की प्रामाणिक सूची तैयार करें और पारंपरिक मछुआरों के पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाएं।
तटीय इलाकों में कानून व्यवस्था और निगरानी को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से गृह मंत्री ने स्थानीय पुलिस कप्तानों को विशेष अधिकार और जिम्मेदारियां सौंपीं। उन्होंने निर्देश दिए कि मछली उतारने के सभी केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। सुरक्षा के इस घेरे को स्थायी आधार देने के लिए उन्होंने इन केंद्रों पर नियमित पुलिसकर्मियों की चौकियां स्थापित करने की बात कही, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा सके और देश का संपूर्ण तटीय सुरक्षा ढांचा पूरी तरह सुदृढ़ बना रहे।



