विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने पर जोर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को एनआरआई नेटवर्क मजबूत करने और स्वैप योजनाओं का लाभ उठाने के दिए निर्देश

नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, निजी बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के शीर्ष प्रबंधन (एमडी और सीईओ) से संवाद किया। बैठक में एफसीएनआर(बी), बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा उधार (ओएफसीबी) से जुड़ी स्वैप पहलों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन किया गया। वित्त मंत्री ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) तक अपनी पहुंच का विस्तार करें ताकि विदेशी मुद्रा जुटाने के अभियान को और तेज किया जा सके।
इस बैठक में बैंकिंग जगत के दिग्गजों के अलावा आर्थिक कार्य विभाग, वित्तीय सेवा विभाग व राजस्व विभाग के सचिवों, मुख्य आर्थिक सलाहकार और भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सहित कई आला अधिकारी उपस्थित रहे। बैंक प्रमुखों ने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि आरबीआई की स्वैप सुविधा योजनाओं के तहत ईसीबी, ओएफसीबी और एफसीएनआर(बी) जमा के मोर्चे पर ठोस प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि इन पहलों को लेकर प्रवासी भारतीय काफी सकारात्मक हैं और तीनों ही योजनाओं को अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है।
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि निवेशकों को लुभाने के लिए पांच वर्ष की अवधि सहित विभिन्न एफसीएनआर(बी) जमाओं पर आकर्षक रिटर्न की पेशकश की जा रही है। नई एफसीएनआर(बी) जमाओं के लिए ब्याज दर की तय सीमा को सस्पेंड किए जाने से भी इस योजना को भारी बल मिला है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया, ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग और अन्य देशों में निवास कर रहे एनआरआई इन योजनाओं में निवेश करने के लिए काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आगामी रूपरेखा पेश करते हुए बैंकों ने फंड जुटाने की अपनी रणनीतियों से मंत्रालय को अवगत कराया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पूरा भरोसा है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) में ईसीबी के रास्ते बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी जुटाई जाएगी। बैंकों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों और लक्षित आउटरीच अभियानों के माध्यम से वे एनआरआई ग्राहकों से जुड़ रहे हैं, जिससे एफसीएनआर(बी) जमा के आंकड़ों में तेजी आई है।
इसके अलावा, बैंकों ने बताया कि वे गुजरात के गिफ्ट सिटी में स्थापित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग इकाइयों (आईबीयू) के माध्यम से अमेरिका, ब्रिटेन, पश्चिम एशिया, सिंगापुर, हांगकांग और दक्षिण-पूर्व एशिया से विदेशी फंड जुटा रहे हैं। इस संदर्भ में वित्त मंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र से कहा कि वे गिफ्ट सिटी के भीतर उपलब्ध बेहतरीन ढांचागत सुविधाओं और वित्तीय सेवाओं का अधिकतम दोहन करें।
आरबीआई की भूमिका पर बात करते हुए केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर ने आश्वस्त किया कि रिजर्व बैंक फंड जुटाने की प्रक्रिया और पात्र ऋणों को सुगम बनाने में बैंकों की हरसंभव सहायता कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि रिजर्व बैंक की दैनिक रिपोर्टिंग व्यवस्था के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अब तक के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त करते हुए बैंकों से कहा कि वे एनआरआई समुदाय के लिए नए और आकर्षक जमा विकल्प पेश करें और फंड जुटाने की इस रफ्तार को योजना की समाप्ति तक कम न होने दें। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकारी और निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के साझा प्रयासों से देश में विदेशी मुद्रा की आमद बढ़ेगी, जिससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारत की बाह्य अर्थव्यवस्था को एक ठोस सुरक्षा कवच मिलेगा।
विदित हो कि आरबीआई द्वारा 5 जून 2026 को घोषित मौद्रिक नीति के तहत नए एफसीएनआर(बी) जमा के लिए अमेरिकी डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा और पात्र ईसीबी व ओएफसीबी के लिए रियायती स्वैप सुविधा की शुरुआत की गई थी। इस कदम का मूल उद्देश्य देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देना और भुगतान संतुलन को मजबूत करना है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए एफसीएनआर(बी) जमा की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 और ईसीबी व ओएफसीबी के लिए आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2026 निर्धारित है।


