शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालते ही एक्शन में आए प्रह्लाद जोशी, उच्च अधिकारियों के साथ की अहम बैठक

रविवार को वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने देश के शिक्षा मंत्री का प्रभार स्वीकार कर लिया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की और विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा की। देश की शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर चल रही व्यापक चर्चाओं के बीच उनका यह नया दायित्व काफी अहम माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत किए जाने के पश्चात प्रधानमंत्री की सिफारिश पर यह अतिरिक्त प्रभार जोशी को सौंपा गया है। जिम्मेदारी मिलते ही उन्होंने बिना समय गंवाए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परिचयात्मक एवं समीक्षात्मक बैठक आयोजित की, जिसमें मंत्रालय की वर्तमान कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श हुआ।

शिक्षा मंत्रालय को राष्ट्र के निर्माण और भावी पीढ़ी के विकास का प्रमुख आधार माना जाता है। ऐसे में नवनियुक्त मंत्री से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी अमल के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षण संस्थानों, कौशल प्रशिक्षण और शोध गतिविधियों को अधिक गति प्रदान करेंगे।

प्रह्लाद जोशी की गिनती केंद्र सरकार के अति अनुभवी और रणनीतिकार मंत्रियों में होती है। वह धारवाड़ (कर्नाटक) से लगातार पांच बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार भी है, जबकि इससे पहले वे कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्रालय का सफल संचालन कर चुके हैं।

लंबे संसदीय और प्रशासनिक जीवन के अनुभव के कारण उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। मौजूदा परिदृश्य में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा तंत्र की साख को दोबारा स्थापित करना और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, शिक्षा के डिजिटल विस्तार, अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण व कौशल-आधारित शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने पर उनका मुख्य ध्यान रहने की संभावना है।

प्रारंभिक बैठकों की शुरुआत के साथ ही यह संकेत मिलने लगे हैं कि मंत्रालय जल्द ही परीक्षा सुधारों, आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों और उच्च शिक्षा से जुड़े लंबित मामलों पर त्वरित निर्णय ले सकता है। अब शैक्षणिक जगत, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नए शिक्षा मंत्री इन राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को किस तरह गति देते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button