देश में अनुसंधान और उन्नत उपचार को बढ़ावा देने के लिए फार्मा उद्योग के साथ सरकार की महत्वपूर्ण बैठक

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) के प्रतिनिधिमंडल के बीच हाल ही में एक रणनीतिक बैठक संपन्न हुई, जिसमें भारत के दवा उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने और अनुसंधान आधारित इकोसिस्टम विकसित करने का संकल्प जताया गया। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के हर नागरिक तक सस्ती चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाना है।
आईपीए के अध्यक्ष डॉ. शारविल पटेल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस बातचीत के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी। उन्होंने इस बैठक को अत्यंत सार्थक बताते हुए कहा कि भारत में शोध एवं विकास, क्लीनिकल रिसर्च और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों में प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
चर्चा के दौरान सरकार और उद्योगपतियों ने साझा प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि नई दवाओं के विकास को रफ्तार दी जा सके। पीयूष गोयल ने आश्वस्त किया कि वर्तमान सरकार देश में व्यापार और अनुसंधान के अनुकूल नीतियां बना रही है, जिससे उद्योग जगत को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ जन-स्वास्थ्य की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके।
ज्ञात हो कि भारतीय फार्मा उद्योग दुनिया भर में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति के लिए जाना जाता है। देश के भीतर विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने और वैज्ञानिक शोध को नई दिशा देने के लिए सरकार द्वारा लगातार विभिन्न मोर्चों पर काम किया जा रहा है।
उद्योग क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को रेखांकित करती एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में देश के फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर सेक्टर ने कुल 13.9 अरब डॉलर मूल्य के 65 सौदे पूरे किए। यदि किसी भारतीय कंपनी द्वारा विदेशों में किए गए 11.8 अरब डॉलर के सबसे बड़े अधिग्रहण को शामिल न भी करें, तब भी यह क्षेत्र पिछली तिमाही के मुकाबले 12 फीसदी की वित्तीय बढ़त दर्शा रहा है।
समीक्षाधीन अवधि में कंपनियों के विलय और अधिग्रहण क्षेत्र में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जहाँ 13.2 अरब डॉलर के 35 समझौते हुए। पिछली तिमाही के मुकाबले सौदों की संख्या 17 प्रतिशत बढ़ी, जो इस क्षेत्र के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर को दर्शाती है। आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि कुल विलय और अधिग्रहण मूल्य में विदेशी बाजार में किए गए सौदों की हिस्सेदारी 96 प्रतिशत रही।



