नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक समकक्षों संग की वार्ता

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कई वैश्विक समकक्षों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में आपसी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अलावा वर्तमान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक सामूहिक तस्वीर साझा करते हुए विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि इस वैश्विक मंच पर कई देशों के मंत्रियों के साथ औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह का सार्थक संवाद हुआ। इस साझा तस्वीर में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के सर्गेई लावरोव, ईरान के सैयद अब्बास अराघची, मिस्र के बद्र अब्देलअट्टी, इंडोनेशिया के सुगियोनो और कजाखस्तान के विदेश मंत्री मुख्तार तिल्यूबेर्दी उपस्थित रहे।
इसके साथ ही विदेश मंत्री जयशंकर ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ भी अलग से द्विपक्षीय वार्ता की। विदेश मंत्री ने इस संवाद को सकारात्मक बताते हुए स्पष्ट किया कि बैठक में द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार और अहम वैश्विक विषयों पर साझा दृष्टिकोण साझा किए गए।
भारत की अध्यक्षता में भारत मंडपम में दो दिनों तक चले इस 18वें शिखर सम्मेलन में सदस्य राष्ट्रों के साथ-साथ साझेदार और विशेष रूप से आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। संगठन के पूर्ण सदस्यों में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। वहीं बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम भागीदार देशों के तौर पर इस प्रक्रिया से जुड़े रहे।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दो दिवसीय संवाद ने यह स्थापित किया है कि ब्रिक्स केवल बहुपक्षीय समूह न होकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान का एक मजबूत तंत्र है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अपने तीसरे दशक में कदम रख रहे इस मंच से विश्व समुदाय को अब मात्र नीतियों की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस परिणामों की उम्मीद है। उन्होंने स्वीकृत ‘नई दिल्ली घोषणा’ के संकल्पों को तय समयसीमा के भीतर लागू करने का आह्वान किया और आगामी अध्यक्षता के लिए चीन को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।



