अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड के फैसलों का असर: शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 150 अंक टूटा, निफ्टी 23,200 से नीचे फिसला

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही, जहां अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक लाल निशान में खुले। विदेशी रुझानों के दबाव में निवेशकों ने शुरुआत से ही रक्षात्मक रुख अपनाना बेहतर समझा।
शुरुआती घंटी बजते ही बीएसई सेंसेक्स 0.21 फीसदी (150 से अधिक अंक) गिरकर 74,182.62 के स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.10 फीसदी या 22.35 अंकों के नुकसान के साथ 23,195.25 पर खुला।
सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो मीडिया शेयरों में सबसे तीखी बिकवाली रही और यह सूचकांक करीब एक फीसदी लुढ़क गया। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र 0.56 फीसदी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.31 फीसदी नीचे आ गए। प्राइवेट बैंक, फार्मा और मिडस्मॉल कैप के वित्तीय तथा आईटी सूचकांकों में भी नकारात्मक रुझान बना रहा।
गिरावट के इस माहौल में सरकारी बैंकों ने बाजार को थामने की कोशिश की, जहां पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.37 फीसदी की बढ़त पर रहा। इसके अलावा केमिकल शेयरों में 0.22 फीसदी, ऑयल एंड गैस में 0.17 फीसदी और एफएमसीजी पैक में 0.13 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई।
विश्लेषकों का मानना है कि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि पहले से तय मानी जा रही थी, लेकिन फेड अधिकारियों की सख्त टिप्पणियों और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के कारण आने वाले समय में वित्तीय स्थिति के नरम पड़ने की उम्मीद कम है।
बाजार पर 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5 फीसदी के करीब टिके रहने का सीधा असर देखा जा रहा है, हालांकि कॉरपोरेट नतीजों की मजबूती से थोड़ी राहत मिलने की गुंजाइश बनी हुई है। संस्थागत आंकड़ों के मुताबिक, बीते कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों ने 2,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि घरेलू फंड्स ने 3,900 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली दर्ज की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी रही; ब्रेंट क्रूड 0.2 प्रतिशत गिरकर 105.62 डॉलर और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.3 प्रतिशत घटकर लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।



