सटीक हमलों से वायुसेना ने दिखाई अपनी ताकत, हर लक्ष्य पहुंच में: एयर चीफ मार्शल

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रविवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर के क्षेत्र और दुश्मन के इलाके में 200 किलोमीटर भीतर तक किए गए सटीक हमलों ने सिद्ध कर दिया है कि भारतीय सेना की पहुंच हर लक्ष्य तक है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि इस अभियान ने संकट के समय त्वरित सैन्य जवाब देने और विरोधियों को रोकने की वायुसेना की निर्णायक भूमिका पर मुहर लगाई है। इस बयान को पड़ोसी देश के लिए एक स्पष्ट सामरिक चेतावनी माना जा रहा है।
यह साहसिक कार्रवाई पिछले साल मई माह में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसके तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत क्षेत्रों में स्थित आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया। वर्ष 1971 के युद्ध के बाद सीमा पार की गई यह सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई थी। चार दिनों तक इस अभियान का प्रत्यक्ष संचालन करने वाले वायुसेना प्रमुख ने बताया कि इस अभियान से यह महत्वपूर्ण सीख मिली है कि सेना को हमेशा कई विकल्पों के साथ तैयार रहना चाहिए ताकि विरोधी की चाल बदलते ही अपनी रणनीति में त्वरित बदलाव किया जा सके।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह विजय समग्र सैन्य क्षमताओं के तालमेल से संभव हुई। सटीक खुफिया जानकारी, लंबी दूरी के हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने एक साथ मिलकर कार्य किया। इस दौरान भारतीय वायु रक्षा तंत्र ने पाकिस्तानी सेना की ओर से भेजे गए बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों को बीच में ही बेअसर कर दिया। इसके अतिरिक्त, घरेलू स्तर पर तैयार हथियारों ने शत्रु के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि अभियान के दौरान किसी भी गैर-सैनिक व्यक्ति अथवा संपत्ति को खरोंच तक नहीं आने दी गई।
आगे की रणनीति का उल्लेख करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वर्तमान सफलता पर रुकने के बजाय मारक क्षमता, सर्विलांस, एंटी-ड्रोन तकनीक और एआई-समर्थित निर्णय प्रणाली को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि युद्ध सामग्री के स्वदेशी उत्पादन और बेहतर लॉजिस्टिक्स के माध्यम से लंबे समय तक सैन्य अभियानों को जारी रखने की ताकत जुटाई जा रही है।
अंत में उन्होंने बताया कि यह पूरी तैयारी ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है। वायुसेना स्वयं को एक ऐसी आधुनिक और तकनीकी रूप से पूर्णतः आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में विकसित कर रही है, जो भविष्य के सभी संघर्षों में देश के आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी हितों की अटूट ढाल बन सके।



