‘सॉल्यूशन एट स्केल’ से वैश्विक समस्याओं का समाधान करेगा भारत: कॉन्क्लेव 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026’ के शुभारंभ अवसर पर कहा कि भारत अब तकनीकी समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने की अनूठी क्षमता हासिल कर चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का उद्देश्य मात्र आधुनिक प्रणालियों का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि विश्व की चुनौतियों को दूर करने वाले नवाचारों का निर्माण करना है। उन्होंने नवाचार से जुड़े सभी हितधारकों—शोधकर्ताओं, युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों से अगले तीन वर्षों के भीतर ठोस उत्पाद और प्रोटोटाइप विकसित करने की अपील की।

संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विज्ञान नीति अब केवल अनुसरण करने की नहीं रही। वैश्विक महामारी के समय स्वदेशी टीके के सफल विकास और वितरण से लेकर अंतरिक्ष में मंगलयान तथा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सफल उपस्थिति तक, भारत ने सिद्ध किया है कि वह जटिल तकनीकों का नेतृत्व करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार डिजिटल स्टैक और 5G नेटवर्क के व्यापक उपयोग ने देश में क्रांति लाई है, उसी तर्ज पर भारत के सफल तकनीकी मॉडल पूरी दुनिया के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

परमाणु और अंतरिक्ष अनुसंधान की प्रगति का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि देश में 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का कुछ महीने पहले ‘फर्स्ट क्रिटिकलिटी’ तक पहुंचना परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर है। वहीं अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी स्टार्टअप्स की भागीदारी पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि देश के एक स्टार्टअप ने पहले ही प्रयास में स्वदेशी रॉकेट से उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया है। इसके साथ ही भारत ने उपग्रहों को आपस में जोड़ने (डॉकिंग) की जटिल तकनीक में भी सफलता अर्जित की है।

आधुनिक प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि देश में निर्मित पहली वाणिज्यिक चिप्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही घरेलू कच्चे माल से संचालित बैटरी स्टोरेज प्रणालियों पर विशेष अनुसंधान जारी है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि आरएंडडी के लिए एक वर्ष के भीतर 24 हजार करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता सुनिश्चित हुई है, जिसमें सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की 12-12 हजार करोड़ रुपये की बराबर हिस्सेदारी है। इस बढ़ते वैज्ञानिक रुझान के कारण वार्षिक पेटेंट पंजीकरण पिछले दस वर्षों में 50 हजार से तिगुना होकर डेढ़ लाख के स्तर पर पहुंच चुका है।

स्वास्थ्य, कृषि और जनकल्याण में तकनीक के उपयोग पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने ब्रेन एक्टिविटी को ट्रैक करने वाले वियरेबल ईईजी उपकरणों, स्टील स्लैग के सदुपयोग और आईआईटी मद्रास के ब्रेन सेंटर द्वारा विकसित 3डी इमेजिंग तकनीक की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह तकनीक तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों को समझने में क्रांतिकारी साबित होगी।

समापन अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि एआई नियमित कार्यों को सुगम बना सकता है, परंतु वैज्ञानिक विश्लेषण और तथ्यों की प्रामाणिकता की जिम्मेदारी मानव मस्तिष्क की ही रहेगी। उन्होंने क्वांटम सुरक्षा, सिंथेटिक बायोलॉजी और साइबर सुरक्षा के खतरों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता जताई और देश के युवाओं से अपील की कि वे तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।

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