विकसित भारत का मार्ग: 6G टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक

हमारा 6G सपना

भारत सरकार अब अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी यानी 6G टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। हमारा लक्ष्य है कि 2047 तक जब भारत विकसित राष्ट्र बने, तब हम दुनिया को 6G देने वाले देशों में सबसे आगे हों।

यह मिशन तीन बड़े सिद्धांतों पर टिका है:

  1. किफ़ायती: तकनीक सबकी पहुँच में हो।
  2. स्थायित्व: लंबे समय तक चलने वाली और पर्यावरण के अनुकूल।
  3. सर्वव्यापकता: देश के कोने-कोने तक पहुँचे।

6G कैसे अलग होगा?

6G, 5G से कई गुना बेहतर होगा।

  • गति: यह 5G से 1,000 गुना तेज़ होगा।
  • विलंबता (Lag): डेटा भेजने और प्राप्त करने में लगभग शून्य अंतराल लगेगा (केवल एक माइक्रोसेकंड)।
  • उपयोग: यह अल्ट्रा-फास्ट कनेक्शन रिमोट सर्जरी, स्मार्ट रोबोट और बेहतरीन वर्चुअल अनुभव के लिए बहुत ज़रूरी है।
  • क्षमता: यह एक बार में बहुत सारा डेटा संभाल सकता है।
  • AI एकीकरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ मिलकर, यह नेटवर्क खुद ही तय करेगा कि डेटा को कहाँ और कैसे सबसे अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना है।

भारत की मुख्य पहलें

भारत ने 22 मार्च 2023 को “भारत 6G विज़न” जारी किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है।

सरकार के कदम:

  • टेस्टबेड्स: अनुसंधान के लिए 6G टीएचजेड और एडवांस ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेस्टबेड्स को पैसा दिया गया।
  • शिक्षा: 6G के लिए छात्रों और स्टार्टअप्स को तैयार करने के लिए देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 100 5G प्रयोगशालाओं को मंज़ूरी दी गई।
  • रिसर्च फंडिंग: 6G से जुड़ी रिसर्च के लिए 104 प्रस्तावों को मंज़ूरी मिली है।
  • फंडिंग स्कीम: दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (TTDF) योजना के तहत ₹310.6 करोड़ की 115 परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली है।

सहयोग का प्रयास: भारत 6G अलायंस (B6GA)

  • B6GA में उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान शामिल हैं।
  • इसका काम स्वदेशी 6G रिसर्च को बढ़ावा देना है।
  • यह अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों के बड़े 6G गठबंधनों के साथ मिलकर काम करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर कर चुका है।

भविष्य के लक्ष्य (IMC 2025 से)

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में हुए अंतर्राष्ट्रीय 6G संगोष्ठी में भारत ने अपनी प्रगति दिखाई।

  • आत्मनिर्भरता: ‘मेड-इन-इंडिया’ 4G स्टैक को सफलता के तौर पर दिखाया गया।
  • आर्थिक लक्ष्य: 2035 तक 6G क्षेत्र से GDP में $1.2 ट्रिलियन का योगदान।
  • पेटेंट लक्ष्य: वैश्विक 6G पेटेंट्स में 10% हिस्सेदारी पाना।
  • वैश्विक संकल्प: नई दिल्ली घोषणापत्र में 6G नेटवर्क को सुरक्षित, समावेशी और किफायती बनाने का संकल्प लिया गया।

 

निष्कर्ष

 

भारत टेक्नोलॉजी का सिर्फ इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहा। भारत 6G अलायंस और टीटीडीएफ जैसी पहलों के माध्यम से, भारत अब टेक्नोलॉजी बनाने वाला (निर्माता) और मानक तय करने वाला देश बन रहा है। यह प्रयास देश को एक कनेक्टेड, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल शक्ति बनाने की नींव रख रहा है।

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