बिजली संशोधन नियम 2026: कैप्टिव पावर प्लांट के लिए लागू हुई नई सत्यापन प्रणाली, विवाद सुलझाने के लिए बनेगी समिति

बिजली मंत्रालय ने कैप्टिव बिजली उत्पादन के ढांचे को पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन संशोधनों के तहत 1 अप्रैल 2026 से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘इंट्रा-स्टेट’ कैप्टिव खपत की जांच के लिए नोडल एजेंसियां नियुक्त की जाएंगी, जबकि राज्यों के बीच (Inter-state) होने वाली बिजली खपत का सत्यापन नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC) द्वारा किया जाएगा।
प्रशासनिक सुधार:
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विवाद निपटान: नियमों के कार्यान्वयन के दौरान पैदा होने वाले विवादों के समाधान के लिए एक ‘ग्रीवांस रेड्रेसल समिति’ का गठन किया जाएगा।
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सत्यापन प्रक्रिया: कैप्टिव स्टेटस का सत्यापन अब पूरे वित्तीय वर्ष के आधार पर होगा। शुरुआती या अंतिम वर्ष में केवल संबंधित कार्य अवधि का ही आकलन किया जाएगा।
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सर्चार्ज में राहत: जब तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उपभोक्ताओं पर CSS (Cross Subsidy Surcharge) और AS (Additional Surcharge) नहीं लगाया जाएगा, बशर्ते वे सही घोषणा प्रस्तुत करें। हालांकि, बाद में उल्लंघन पाए जाने पर लेट पेमेंट चार्ज के साथ शुल्क देय होगा।



