मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद ने औद्योगिक प्रोत्साहन, सड़क निर्माण, और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर मोहर लगाई

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बुंदेलखंड के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने बुंदेलखंड को औद्योगिक केंद्र बनाने, रोजगार के अवसर पैदा करने, सिंचाई का दायरा बढ़ाने और बेहतर सड़कों के निर्माण के साथ-साथ नौरादेही अभ्यारण्य में चीता के लिए तीसरा घर विकसित करने को भी स्वीकृति दी। इन विकासोन्मुखी फैसलों के लिए मुख्यमंत्री का करतल ध्वनि से स्वागत किया गया।

सागर के ‘मसवासी ग्रंट’ के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज

बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सागर के औद्योगिक क्षेत्र ‘मसवासी ग्रंट’ के लिए एक विशिष्ट औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई है।

  • आर्थिक लाभ: यह पैकेज 24,240 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करेगा और 29,000 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करेगा।

  • प्रमुख रियायतें: भूमि प्रब्याजी और वार्षिक भू-भाटक सिर्फ एक रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित की गई है। विकास शुल्क का भुगतान 20 आसान वार्षिक किश्तों में किया जा सकेगा। निवेशकों को स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में पूरी 100% प्रतिपूर्ति तथा वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने से पांच साल तक विद्युत शुल्क में छूट मिलेगी। यह पैकेज आगामी पांच वर्षों तक लागू रहेगा।

आधारभूत संरचना का विस्तार

  • सड़क: सागर से दमोह तक 76.680 किमी फोरलेन सड़क (मय पेव्हड शोल्डर) के निर्माण के लिए 2,059 करोड़ 85 लाख रुपये की परियोजना वित्तीय लागत को स्वीकृति मिली है।

  • सिंचाई: दमोह जिले के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ 6 लाख रुपये की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई, जिससे 3600 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई मिल सकेगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम

  • नए मेडिकल कॉलेज: नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दमोह, छतरपुर और बुधनी के लिए 990 नियमित और 615 आउट सोर्स पदों की स्वीकृति दी गई।

  • अस्पतालों का उन्नयन: 11 जिलों की 12 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन और उनके संचालन हेतु 348 नियमित/संविदा पदों के सृजन को मंजूरी मिली है। इसमें कई 30-बिस्तरीय केंद्रों को 50 या 100 बिस्तरीय सिविल अस्पतालों में अपग्रेड करना शामिल है।

चीता संरक्षण और अंतर्राष्ट्रीय रोजगार

  • चीता रहवास: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही को कूनो और गांधी सागर के बाद देश में चीतों के तीसरे रहवास के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

  • जापान-जर्मनी रोजगार: पिछड़ा वर्ग के 600 युवाओं को दो वर्षों में रोजगार दिलाने के लिए उन्हें सोशल इंपैक्ट बांड (SIB) के तहत जापान और जर्मनी भेजने की परियोजना को मंजूरी दी गई।

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