‘युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं’: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने निजी क्षेत्र से रक्षा उत्पादन में 50% भागीदारी का किया आह्वान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नागपुर में रक्षा क्षेत्र की जटिलताओं पर चर्चा करते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला और सूचना जैसे क्षेत्रों में लड़े जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को 50% से अधिक तक ले जाना है।
निजी क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां:
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नागास्त्र ड्रोन: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले के लिए सफल उपयोग।
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भार्गवस्त्र: सोलर कंपनी द्वारा विकसित स्वदेशी काउंटर ड्रोन सिस्टम का सफल परीक्षण।
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रक्षा निर्यात: भारत का रक्षा निर्यात पिछले 10 वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये हो गया है।
राजनाथ सिंह ने ‘सार्वजनिक-निजी तालमेल’ को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रों को एक-दूसरे का पूरक बनकर राष्ट्रीय हितों के लिए काम करना चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज आत्मनिर्भरता के सफर के कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए, जो पिछले एक दशक में आए बदलाव को दर्शाते हैं:
| विवरण | वर्ष 2014 | वर्ष 2026 (वर्तमान) |
| कुल घरेलू रक्षा उत्पादन | ₹46,425 करोड़ | ₹1.51 लाख करोड़ (रिकॉर्ड) |
| रक्षा निर्यात | ₹1,000 करोड़ से कम | ₹24,000 करोड़ |
| निजी क्षेत्र का योगदान | – | ₹33,000 करोड़ से अधिक |
रक्षा मंत्री ने बताया कि 30 मिमी के मध्यम कैलिबर गोला-बारूद की कमी अब अतीत की बात हो गई है। नागपुर में स्थापित नया संयंत्र न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत करेगा। उन्होंने निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित ‘मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड’ की सफलता को भी याद किया।



