डीपफेक और भ्रामक जानकारी पर कड़ा प्रहार: जानें नए IT नियमों से क्या बदलेगा?

भारत सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गजों जैसे X (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब, फेसबुक और स्नैपचैट के लिए नए सुरक्षा मानक निर्धारित किए हैं। मंगलवार को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अब किसी भी प्रकार के AI-जनित कंटेंट को बिना पहचान (लेबल) के प्रसारित करना गैर-कानूनी माना जाएगा।
नियमों की तकनीकी बारीकियां:
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अनिवार्य लेबलिंग: नियम 3(3) के अंतर्गत, ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ यानी AI द्वारा बनाई गई जानकारी पर एक स्पष्ट और स्थायी लेबल लगाना होगा। विजुअल कंटेंट में यह लेबल कुल स्क्रीन एरिया का कम से कम 10% होना चाहिए। ऑडियो सामग्री के लिए, शुरुआत के 10% समय में यह स्पष्ट घोषणा करनी होगी कि यह AI जनित है।
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मेटाडेटा एम्बेडिंग: कंपनियों को हर AI फाइल में एक यूनिक आइडेंटिफायर या मेटाडेटा जोड़ना होगा। यह डिजिटल सिग्नेचर की तरह काम करेगा, जिसे न तो हटाया जा सकेगा और न ही बदला जा सकेगा।
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प्री-अपलोड स्क्रीनिंग: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब ऐसे उन्नत तकनीकी तंत्र विकसित करने होंगे जो फाइल अपलोड होने से पहले ही यह पहचान सकें कि वह AI द्वारा बनाई गई है या नहीं।



