पश्चिम एशिया संकट पर लोकसभा में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कहा—भारत के सामने बढ़ीं चुनौतियां

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है और इसका नकारात्मक प्रभाव न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, बल्कि आम लोगों के जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। इस स्थिति ने भारत के सामने भी कई अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

लोकसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के उन देशों के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध हैं, जो इस संघर्ष में शामिल हैं या उससे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है और विशेष रूप से भारत की कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी इलाके से आता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रह रहे हैं और कार्यरत हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों का संचालन होता है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य कार्य करते हैं। इन सभी कारणों से भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस विषय पर संसद से एकजुट और स्पष्ट संदेश दुनिया तक पहुंचना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रभावित देशों में मौजूद हर भारतीय को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो बार फोन पर बातचीत की है और सभी ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

इसके साथ ही, भारत और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे सक्रिय आउटरीच केंद्र और आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की गई हैं। इन माध्यमों से लोगों को लगातार ताजा जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट की घड़ी में देश और विदेश में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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