ईरान संघर्ष पर ट्रंप सरकार घिरी, डेमोक्रेट नेताओं ने उठाए रणनीति और लागत पर गंभीर सवाल

अमेरिका में ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। प्रमुख डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बढ़ाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति के अभाव और इसके लंबे समय तक खिंचने की आशंका पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकार अब तक इस संघर्ष के उद्देश्यों और आगे की योजना को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रख पाई है।

सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन इसके खत्म होने के कोई संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध की दिशा और भविष्य की रणनीति को लेकर स्पष्ट जवाब देने में असफल रहे हैं। शूमर ने व्हाइट हाउस के बयानों को भी विरोधाभासी बताते हुए कहा कि यह स्थिति एक मजबूत नेतृत्व को नहीं दर्शाती। उनके अनुसार, या तो राष्ट्रपति स्थिति को लेकर भ्रमित हैं, या फिर सच्चाई सामने नहीं रख रहे हैं, या फिर दोनों ही बातें एक साथ हो रही हैं।

चक शूमर ने इस युद्ध के आर्थिक प्रभावों को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले अमेरिका में गैस की औसत कीमत लगभग 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। उन्होंने इस बढ़ोतरी को हाल के वर्षों में सबसे तेज मासिक उछालों में से एक बताया और इसे रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद देखी गई स्थिति से जोड़ा। उन्होंने सीनेट में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए रिपब्लिकन नेताओं से भी हस्तक्षेप करने की अपील की, ताकि सरकार स्पष्ट रणनीति और युद्ध समाप्त करने का रोडमैप पेश करे।

वहीं, सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान में चल रहे अभियान को समाप्त किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष का विस्तार नहीं होना चाहिए और न ही इसमें जमीनी सैनिकों को भेजा जाना चाहिए। लैंड्समैन के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया है और हथियारों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका इस संघर्ष में और गहराई से शामिल होता है, तो वह बिना स्पष्ट रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंस सकता है।

सीनेटर पीटर वेल्च ने भी सरकार की नीति की आलोचना करते हुए 200 अरब डॉलर के युद्ध फंड की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि देश इस पीढ़ी के सबसे बड़े युद्धों में से एक में गहराई से शामिल हो चुका है, लेकिन अब तक इस मुद्दे पर सीनेट में एक भी औपचारिक सुनवाई नहीं हुई है। वेल्च ने आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि पूरे देश में पेट्रोल की कीमतों में कम से कम 1 डॉलर की वृद्धि हुई है, जिससे एक सामान्य अमेरिकी परिवार पर सालाना लगभग 2,000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसके अलावा, उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवारों को करीब 1,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

इसी बीच, सीनेटर सारा जैकब्स ने इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती करार दिया। उन्होंने कहा कि यह संभवतः अमेरिका की विदेश नीति की सबसे बड़ी चूकों में से एक है। जैकब्स ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम नागरिकों को यह तक नहीं बताया जा रहा है कि यह युद्ध किस उद्देश्य से लड़ा जा रहा है, इसकी वास्तविक लागत क्या है और इसका अंत कब और कैसे होगा।

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