2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य की समीक्षा; पीयूष गोयल ने कार्य योजना पर की उच्च स्तरीय बैठक

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वर्ष 2030-31 तक भारत के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ‘निर्यात प्रोत्साहन मिशन’ (EPM) की प्रगति का बारीकी से आकलन किया गया। चर्चा के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कृषि निर्यात, वेयरहाउसिंग और ‘ब्रांड इंडिया’ की वैश्विक साख को और अधिक सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

सरकार की रणनीति के अनुसार, इस 2 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य में 1 ट्रिलियन डॉलर का माल (merchandise) और 1 ट्रिलियन डॉलर का सेवा निर्यात शामिल है। वाणिज्य विभाग द्वारा तैयार किए गए निगरानी ढांचे के तहत इंजीनियरिंग, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को समयबद्धता, जवाबदेही और प्रदर्शन संकेतकों के तीन मुख्य स्तंभों के आधार पर हासिल किया जाएगा।

समन्वय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मंत्री ने अंतर-विभागीय सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य के लिए संबंधित मंत्रालयों और विभागों की भूमिका और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। प्रगति की निगरानी को पारदर्शी बनाने के लिए उन्होंने एक आईटी-सक्षम प्लेटफॉर्म और स्वचालित समीक्षा तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिससे कार्यों का वास्तविक समय में मूल्यांकन किया जा सके।

पीयूष गोयल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि निर्यात प्रोत्साहन मिशन का लाभ जमीनी स्तर पर एमएसएमई और नए निर्यातकों तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कृषि निर्यात को प्राथमिकता देने और उसे कार्य योजना के हर घटक में अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी बताया गया कि ई-कॉमर्स निर्यातकों की सहायता, व्यापार वित्त की उपलब्धता, परीक्षण, प्रमाणीकरण और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसे कई महत्वपूर्ण कदम ईपीएम के तहत पहले ही उठाए जा चुके हैं।

वैश्विक बाजार में भारत की पैठ बढ़ाने के लिए ‘ब्रांड इंडिया’ को एक मजबूत पहचान देने की बात कही गई। इसके लिए गोयल ने आगामी तीन वर्षों के लिए व्यापार मेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों का एक पूर्व-निर्धारित कैलेंडर तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि निर्यात संवर्धन परिषदों और डीजीएफटी के माध्यम से जागरूकता बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे निर्यातकों तक पहुँचे। अंत में, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासित क्रियान्वयन और प्रभावी समन्वय से यह ऐतिहासिक लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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