ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार की रणनीति: 60 दिनों का बैकअप तैयार, राजनाथ सिंह ने की आर्थिक सुरक्षा की समीक्षा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा और आर्थिक स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट साझा की है। सोमवार को आयोजित मंत्री समूह की पाँचवीं बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पेट्रोलियम, रेलवे, नागरिक उड्डयन और उर्वरक मंत्रालयों के साथ मिलकर आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल की देश में कोई भौतिक कमी नहीं है, इसलिए जनता को पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है।
आर्थिक मोर्चे पर सरकार विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी में है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय और रिजर्व बैंक के अधिकारियों के बीच सोना एवं कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी आयातों को सीमित करने पर चर्चा हुई है। इसका उद्देश्य डॉलर के भुगतान को कम करना और $703 अरब के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे अतिरिक्त भार को नियंत्रित करना है। दरअसल, तेल की कीमतों में उछाल के कारण देश का दैनिक तेल आयात बिल ₹3,141 करोड़ से बढ़कर ₹4,760 करोड़ तक पहुँच गया है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि तेल विपणन कंपनियों के बढ़ते नुकसान को देखते हुए कीमतों में संशोधन अपरिहार्य हो सकता है। फिलहाल कंपनियाँ आम उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों के झटके से बचाने के लिए भारी घाटा सह रही हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि रणनीतिक स्तर पर 15 मई के बाद कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की जा सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर नए आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसाधनों के संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और नागरिकों से आग्रह किया कि जहाँ संभव हो, ईंधन की बचत करें। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों से भी अपील की है कि वे कम से कम पाँच विदेशी पर्यटकों को भारत भ्रमण के लिए प्रोत्साहित करें, जिससे पर्यटन क्षेत्र और विदेशी मुद्रा अर्जन को बल मिल सके।
तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, भारत के तीन प्रमुख भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) फिलहाल 3.37 मिलियन मीट्रिक टन तेल से भरे हुए हैं। यह स्टॉक अकेले 9.5 दिनों की राष्ट्रीय जरूरत पूरी कर सकता है, जिसे जब तेल कंपनियों के इन्वेंट्री स्टॉक के साथ जोड़ा जाता है, तो यह कुल 60 दिनों की सुरक्षा प्रदान करता है। सरकार का मुख्य ध्यान अब इस बात पर है कि ऊर्जा खपत के पैटर्न को बदलकर आयात पर निर्भरता और वित्तीय बोझ को कैसे संतुलित किया जाए।



