मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए विभागों को सार्थकता सिद्ध करनी होगी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित नोडल विभागों की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की भावी विकास योजनाओं का खाका खींचा। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने कहा कि जनहित में किए जाने वाले तमाम नवाचारों को सरकार पूरा प्रोत्साहन देगी। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि जिन क्षेत्रों में जिले या विभाग पीछे रह गए हैं, वहां हर संभव सुधार किया जाए। मुख्यमंत्री ने व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए बायोमैट्रिक हाजिरी को पूरे प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में लागू करने की बात कही और स्वयं भी औचक निरीक्षण करने के संकेत दिए।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने ‘स्वामित्व योजना’ के क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गांवों में आबादी भूमि के निःशुल्क पट्टों की रजिस्ट्री प्राथमिक रूप से महिलाओं के नाम पर की जाए। इस प्रक्रिया को सरल बनाने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इससे जोड़ने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों को सौंपी गई है, ताकि ग्रामीण आबादी को शहरों की तरफ पलायन न करना पड़े। इसके अलावा शहरी सीमाओं से लगे गांवों में सुनियोजित नियोजन कर वहां खेल मैदान, स्कूल और आवश्यक दुकानें विकसित करने के निर्देश दिए गए।

नर्मदा नदी के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। बैठक में मुख्यमंत्री ने हर महीने के पहले सोमवार को ‘नर्मदा समग्र मिशन’ की अनिवार्य समीक्षा बैठक तय की है। उन्होंने अमरकंटक सहित सभी प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों पर सीमेंट-कंक्रीट के पक्के निर्माणों को सीमित करने और प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने के लिए दूर सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्देश दिया। परिक्रमा वासियों की सुविधाओं का ध्यान रखने और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की बात भी कही गई।

सामाजिक समरसता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभिनव पहल करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शालेय स्तर पर अलग-अलग वर्गों के हॉस्टलों के बजाय सभी समाजों के बच्चों के लिए ‘कॉमन हॉस्टल’ संचालित किए जाएं। निःसंतानता की समस्या से जूझ रहे परिवारों की मदद के लिए राज्य में आईवीएफ (IVF) सेंटर स्थापित करने की कार्ययोजना बनाने को कहा गया। साथ ही, सांदीपनी विद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक समय के बाद परिसर का उपयोग स्किल डेवलपमेंट, कंप्यूटर ट्रेनिंग और कोचिंग के लिए करने का सुझाव दिया। हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरणों को पारंपरिक, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती आवास निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कड़ी में चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की धारा को अविरल बनाए रखने और श्रीराम वन गमन पथ, श्रीकृष्ण पाथेय व चित्रकूट धाम के विकास कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए। महाकाल महालोक की तर्ज पर प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए होमगार्ड बल की सेवाएं ली जाएंगी, जिससे बल की क्षमता का संवर्धन होगा। इसके साथ ही गरीब तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न समाजों द्वारा बनाई जाने वाली धर्मशालाओं में राज्य शासन द्वारा सहयोग दिए जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने दोहराई।

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