गुटेनबर्ग में प्रवासी भारतीयों ने किया पीएम मोदी का भव्य स्वागत, प्रधानमंत्री ने बंगाली में संवाद कर प्रवासियों का जीता दिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक यात्रा के तहत रविवार को स्वीडन के गुटेनबर्ग शहर पहुंचे, जहां वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक बंगाली संस्कृति के अनूठे रंग में उनका आत्मीय स्वागत किया। इस स्वागत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह का अभिवादन बंगाली भाषा में ‘भालो आछे’ (मैं अच्छा हूँ / सब अच्छे हैं) कहकर किया। प्रधानमंत्री के मुंह से अपनी मातृभाषा सुनकर वहां मौजूद प्रवासी भारतीय अत्यंत उत्साहित हो उठे, जिससे पूरा माहौल बेहद भावुक और यादगार बन गया।
इस विशेष सांस्कृतिक आयोजन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि बंगाली संस्कृति की लोकप्रियता आज वैश्विक स्तर पर स्थापित हो चुकी है और स्वीडन भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि इस सांस्कृतिक अभिनंदन समारोह के दौरान उनके साथ स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन भी उपस्थित थे, जिनकी मौजूदगी में भारत की समृद्ध बंगाली संस्कृति की बेहद मनमोहक और गौरवशाली झलक देखने को मिली।
अपने देश के प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर गुटेनबर्ग में रह रहे भारतीय प्रवासियों का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए कई नागरिकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को इतने करीब से देखना और उनसे सीधा संवाद स्थापित करना उनके जीवन का एक ऐसा अनुभव है जिसे वे कभी नहीं भूल सकते। वहीं कुछ अन्य लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री की केवल एक झलक पाने के लिए वे काफी लंबे समय से कार्यक्रम स्थल पर प्रतीक्षा कर रहे थे, और उनकी यह प्रतीक्षा पूरी तरह सफल रही।
समारोह का सबसे भावनात्मक पल वह था जब पीएम मोदी ने बंगाली संस्कृति के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए ‘भालो आछे’ शब्द का प्रयोग किया। कार्यक्रम में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाली एक महिला ने बताया कि प्रधानमंत्री ने न केवल उनकी प्रस्तुति को बेहद ध्यानपूर्वक और रुचि लेकर देखा, बल्कि बातचीत के दौरान अपनी चिरपरिचित सादगी और आत्मीयता से वहां उपस्थित हर व्यक्ति के दिल में एक खास जगह बना ली।
इस यात्रा को लेकर स्वीडन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय युवाओं और शोधार्थियों में भी भारी सकारात्मकता देखी जा रही है। समारोह में आए एक छात्र ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के इस आधिकारिक दौरे से स्वीडन में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे। युवाओं ने इस कूटनीतिक यात्रा को अपने सुनहरे भविष्य और करियर के दृष्टिकोण से एक बेहद शुभ संकेत माना है।
प्रवासी भारतीयों के लिए यह आयोजन केवल एक औपचारिक मुलाकात न होकर देश की मिट्टी से जुड़ाव का एक माध्यम बन गया। एक महिला ने भावुक होते हुए कहा कि सात समंदर पार विदेशी धरती पर देश के शीर्ष नेता से इस तरह मिलना उनके लिए किसी सुखद स्वप्न जैसा था, जिसे महसूस कर उनकी आंखें भर आईं। कार्यक्रम के समापन पर प्रवासी समुदाय ने इस सफल और गरिमामयी आयोजन के लिए भारतीय राजनयिकों व अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और उम्मीद जताई कि इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान भारत और स्वीडन के आपसी कूटनीतिक संबंधों को एक नई वैचारिक गहराई प्रदान करेंगे।



