रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीन दिवसीय दौरे पर दक्षिण कोरिया पहुंचे, सैन्य साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर होगी द्विपक्षीय वार्ता

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 19 मई को तीन दिनों की सरकारी यात्रा पर दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंच चुके हैं। 21 मई तक चलने वाले इस दौरे का मुख्य लक्ष्य दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रक्षा तालमेल, सामरिक संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना है। सियोल आगमन पर रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि यह दौरा साझा हितों को बढ़ावा देने और आपसी रिश्तों को एक नई दिशा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।
अपनी इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस वार्ता में मुख्य रूप से सैन्य समन्वय, रक्षा विनिर्माण, समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा, तकनीकी आदान-प्रदान और क्षेत्रीय शांति से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, वह रक्षा उत्पादन और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दक्षिण कोरिया के अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) के मंत्री ली योंग-चेओल के साथ भी एक विशेष बैठक का हिस्सा बनेंगे।
इस दौरे का एक अन्य प्रमुख आकर्षण भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन होगा, जिसकी अध्यक्षता स्वयं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों देशों के कॉरपोरेट और उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल होकर व्यापारिक संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। द्विपक्षीय संबंधों के ऐतिहासिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए 21 मई को दक्षिण कोरिया में एक भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया जाएगा। इस विशेष समारोह में राजनाथ सिंह के साथ दक्षिण कोरियाई मंत्री क्वोन ओह-यूल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारत द्वारा दिए गए ऐतिहासिक और मानवीय योगदान की याद में स्थापित किया जा रहा है। उस कालखंड में भारतीय सेना की 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट ने तीन साल से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दी थीं, जिसके तहत दो लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज और लगभग 2,500 ऑपरेशन किए गए थे। इतना ही नहीं, भारत ने युद्ध के बाद बने तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग का नेतृत्व भी संभाला था, और भारतीय सेना की कस्टोडियन फोर्स ने करीब 2,000 युद्धबंदियों की सुरक्षित और शांतिपूर्ण घर वापसी सुनिश्चित कराई थी।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की ‘इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी’ के बीच का तालमेल दोनों देशों को काफी करीब ला रहा है। लोकतांत्रिक मूल्यों, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता इस रणनीतिक रिश्ते को लगातार मजबूत कर रही है। दक्षिण कोरिया पहुंचने से पहले रक्षा मंत्री 18 से 19 मई तक वियतनाम के सफल दौरे पर थे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन दोनों एशियाई देशों की यात्राओं से रणनीतिक सैन्य जुड़ाव और रक्षा उद्योगों की साझेदारी मजबूत होगी, जो पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।



