ओस्लो में मिले पीएम मोदी और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का संकल्प

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में चल रहे तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान 19 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के बीच एक सार्थक बैठक संपन्न हुई। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच डिजिटल बदलाव और पर्यावरण-अनुकूल विकास को गति देना था। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भविष्य की रणनीतिक साझीदारी को मजबूत करने के लिए औद्योगिक क्षेत्र, रिसर्च संस्थानों और यूनिवर्सिटीज के बीच सहयोग को बढ़ाना अनिवार्य है।

तकनीकी सहयोग के मोर्चे पर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने माना कि भविष्य की आर्थिक तरक्की पूरी तरह से डिजिटलीकरण और सतत विकास पर निर्भर है। इस संदर्भ में उन्होंने दोनों देशों के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक (5G/6G), क्वांटम टेक्नोलॉजी और स्पेस सेक्टर में हो रहे सहयोग की समीक्षा की। साथ ही, सर्कुलर इकोनॉमी, क्लीन एनर्जी, उच्च शिक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच सीधे संवाद को बढ़ाने के उपायों पर भी विमर्श हुआ।

व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के इरादे से दोनों देशों ने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी विभिन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत और फिनलैंड के व्यापार में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे देखते हुए दोनों नेताओं ने आगामी 2030 तक इस द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का साझा संकल्प दोहराया। नेताओं ने दोनों देशों की अग्रणी टेक कंपनियों द्वारा एक-दूसरे के बाजारों में किए जा रहे निवेश और परिचालन विस्तार का स्वागत किया।

इस बातचीत के दौरान फिनलैंड की तरफ से वहां के तकनीकी इकोसिस्टम में भारतीय प्रोफेशनल्स द्वारा किए जा रहे बेहतरीन कार्यों की तारीफ की गई। फिनिश पीएम ने कहा कि भारतीय विशेषज्ञ उनके देश में नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने घोषणा की कि सितंबर 2026 में भारत के गुजरात राज्य (गांधीनगर) में दोनों देश मिलकर ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम’ की मेजबानी करेंगे।

बैठक के अंतिम चरण में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच संबंधों को लेकर भी बात हुई। प्रधानमंत्री मोदी और पीएम ओर्पो ने भारत-फिनलैंड संबंधों को लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित बताया। फिनलैंड को नॉर्डिक क्षेत्र और ईयू में भारत का एक भरोसेमंद साझेदार करार देते हुए दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी पर संतोष व्यक्त किया। दोनों देशों ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की वकालत की और वैश्विक मंचों पर आपसी समन्वय को और गहरा करने की बात कही।

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