आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी कामयाबी: 100 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड एबीएचए से जुड़े, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को मिली रफ्तार

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा संचालित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। देश के डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करते हुए अब तक 100 करोड़ से भी ज्यादा स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खातों (ABHA) के साथ सफलतापूर्वक संबंद्ध कर दिया गया है। भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए देश में एक सुदृढ़, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का ताना-बाना तैयार किया जा रहा है।

इस डिजिटल अभियान की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल 15 महीनों के भीतर ही लिंक किए गए स्वास्थ्य दस्तावेजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। फरवरी 2025 तक जहां यह आंकड़ा 50 करोड़ के स्तर पर था, वहीं अब यह 100 करोड़ को पार कर चुका है। शुरुआती दौर में बेहद कम संख्या (1,000 से भी नीचे) से कदम बढ़ाने वाला यह मिशन आज के समय में हर दो से तीन महीने के भीतर लगभग 10 करोड़ नए रिकॉर्ड्स को एबीएचए से जोड़ रहा है, जिससे यह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ नेटवर्क्स में तब्दील हो गया है।

इस राष्ट्रीय उपलब्धि को हासिल करने में केंद्र व राज्य सरकारों के विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों, राज्य स्तरीय सार्वजनिक मंचों और निजी क्षेत्र के हेल्थ-टेक पार्टनर्स ने बेहद अहम भूमिका निभाई है। मौजूदा समय में देश के तकरीबन 450 से अधिक सरकारी और निजी स्वास्थ्य तकनीकी समाधान इस नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। इन सभी साझेदारों के सामूहिक प्रयासों से मेडिकल रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण और उनके सुरक्षित आदान-प्रदान की प्रक्रिया को काफी गति मिली है।

नागरिकों की सहूलियत के लिए एबीएचए (ABHA) एक सुरक्षित डिजिटल हेल्थ आइडेंटिटी कार्ड के रूप में कार्य करता है। इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अस्पतालों, जांच प्रयोगशालाओं और क्लीनिकों में अपनी मेडिकल हिस्ट्री को डिजिटल रूप से स्टोर और एक्सेस कर सकता है। एबीडीएम की इस सहमति-आधारित (कंसेंट-बेस्ड) प्रणाली के अंतर्गत मरीज अपनी इच्छा से चिकित्सकों के साथ अपने मेडिकल दस्तावेज साझा कर सकते हैं, जिससे इलाज की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस, पारदर्शी और त्वरित हो गई है।

राज्यों की प्रगति पर नजर डालें तो इस लिंकिंग प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश देश भर में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जहां सर्वाधिक 15.03 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। इस सूची में 11.95 करोड़ रिकॉर्ड्स के साथ आंध्र प्रदेश दूसरे पायदान पर है। इनके अलावा बिहार में 7.37 करोड़, राजस्थान में 6.32 करोड़ और गुजरात में 4.77 करोड़ रिकॉर्ड्स को डिजिटल खातों से जोड़कर बेहतरीन कार्य किया गया है।

इस महा-अभियान में देश के कई बड़े सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे कोविन, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), ई-कवच, ई-अस्पताल, ई-सुश्रुत, टेको और आईएचएमएस सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र की तमाम अग्रणी हेल्थ-टेक कंपनियां भी आम जनता के चिकित्सा दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से डिजिटल रूप देने और उन्हें लिंक करने में निरंतर सक्रिय योगदान दे रही हैं।

इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर बात करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि 100 करोड़ से अधिक चिकित्सा दस्तावेजों का एबीएचए से जुड़ना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि देशवासी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को कितनी तेजी से स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एबीडीएम का मुख्य ध्येय नागरिकों को देश की स्वास्थ्य प्रणाली के केंद्र में लाना है, ताकि हर व्यक्ति को बेहद सुरक्षित, सहमति पर आधारित और बाधारहित चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।

देश के समग्र डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाने के लिए इस मिशन के तहत कई महत्वपूर्ण प्रणालियों का विकास किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से एबीएचए, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR), हेल्थ इंफॉर्मेशन एक्सचेंज एंड कंसेंट मैनेजर (HIE-CM), यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) और नेशनल हेल्थ क्लेम एक्सचेंज (NHCX) शामिल हैं। इन अत्याधुनिक डिजिटल माध्यमों के समन्वय से भारत में एक पूर्णतः सुरक्षित, आपस में जुड़ने योग्य (इंटरऑपरेबल) और नागरिक-अनुकूल स्वास्थ्य ढांचा आकार ले रहा है।

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