फाल्टा पुनर्मतदान में भाजपा की बंपर जीत, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर साधा निशाना, कहा- जनता ने दिया करारा जवाब

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी की एकतरफा जीत पर वहां के नागरिकों का आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंदी दल तृणमूल कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा कि कुख्यात हो चुका ‘डायमंड हार्बर’ मॉडल अब हकीकत में ‘तृणमूल के पतन’ का जरिया बन गया है। उन्होंने कहा कि फाल्टा के जागरूक मतदाताओं ने भाजपा के प्रत्याशी देबांग्शु पांड्या के पक्ष में भारी वोटिंग करके उन्हें विधानसभा भेजने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसके लिए वे वहां की जनता को नमन करते हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के वोटरों का विशेष आभार जताते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जनता से अपील की थी कि वे भाजपा उम्मीदवार की 1 लाख वोटों के अंतर से जीत तय करें। फाल्टा के लोगों ने इस उम्मीद से भी आगे बढ़कर देबांग्शु पांड्या को 1 लाख 8 हजार से अधिक मतों के बड़े अंतर से विजयी बनाया। मुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त किया कि क्षेत्र में चहुंमुखी विकास करके इस अटूट विश्वास की कीमत चुकाई जाएगी और भाजपा एक ‘स्वर्णिम फाल्टा’ के निर्माण के संकल्प को हर हाल में पूरा करेगी।

सत्ताधारी दल से विपक्ष में आई पार्टी पर सीधा वार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो संगठन सिद्धांतों और राजनीतिक मूल्यों से पूरी तरह शून्य हो चुका था, वह केवल एक ‘माफिया कंपनी’ की तरह काम कर रहा था। अब सत्ता हाथ से जाने के बाद उस दल का वास्तविक और जर्जर ढांचा सबके सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने सत्ता और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर जनता के पैसों की जमकर उगाही की। सिंडिकेट राज और भय का माहौल बनाकर पूरे राज्य को अपनी निजी जागीर की तरह चलाया गया और लोगों के अधिकारों को कुचला गया।

तृणमूल के एक प्रमुख चेहरे पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अचानक सामने आकर खुद को ‘कमांडर’ बताने वाले एक जालसाज ने ऐसा कोई गुनाह नहीं है जो न किया हो। अपने व्यक्तिगत आपराधिक सिंडिकेट को पालने-पोसने के लिए ‘शेर का मुखौटा पहने इस बिल्ली’ ने लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इसी कारण पिछले चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाते हुए तृणमूल ने इस विधानसभा सीट पर डेढ़ लाख वोटों की बढ़त हासिल की थी। लेकिन डेढ़ दशक बाद जब जनता को बिना किसी खौफ के अपनी मर्जी से वोट देने का अधिकार मिला, तो वास्तविक हकीकत खुलकर सामने आ गई।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस के पतन की तो यह महज शुरुआत है और आने वाले दिनों में उसे जनता द्वारा पूरी तरह नकारे जाने का एक लंबा सफर तय करना होगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आगामी चुनावों में तृणमूल के बड़े नेताओं को ‘नोटा’ के खिलाफ अपनी जमानत बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में ‘नोटा’ से भी कम वोट पाकर अपनी फजीहत करा चुकी है, और अब पश्चिम बंगाल की जनता भी आने वाले समय में अपने राज्य के भीतर तृणमूल और नोटा के बीच इसी तरह की चुनावी जंग देखने का इंतजार कर रही है।

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