अंतिम चरण में पहुंचा जोजिला टनल का निर्माण; दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में अब हर मौसम में खुली रहेगी कश्मीर-लद्दाख की राह

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 11,578 फीट की ऊंचाई पर निर्माणाधीन 13.14 किलोमीटर लंबी जोजिला सुरंग का खुदाई कार्य अपने अंतिम मुकाम (ब्रेकथ्रू) के बिल्कुल करीब है, जो भारतीय अवसंरचना विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। एशिया की इस अनूठी और विश्व की सबसे लंबी दो-तरफा सुरंग के तैयार होने से कश्मीर तथा लद्दाख के बीच बारहमासी सड़क संपर्क स्थापित हो जाएगा। इससे स्थानीय परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को भी अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

मंगलवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए सुरंग परियोजना के इंजीनियर यूसुफ एस्हागपोर ने इसे देश के लिए एक अत्यंत गौरवशाली उपलब्धि करार दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों दिशाओं से यातायात की सुविधा देने वाली यह टनल अपनी तरह की अनूठी और पूरे एशिया में पहली परियोजना है। दुर्गम परिस्थितियों में मिली कामयाबी को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि टीम ने तमाम बाधाओं को पार कर लिया है और अब मात्र तीन मीटर की माइनिंग का काम बचा है, जिसके तुरंत बाद आधिकारिक तौर पर अंतिम ब्लास्टिंग कर दी जाएगी।

सुरक्षा मानकों की चर्चा करते हुए इंजीनियर एस्हागपोर ने आगे कहा कि इस टनल के चालू होने के बाद सुरक्षा और परिचालन से जुड़े कई बड़े सरोकार हल हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस निर्माण के दौरान बिना किसी अप्रिय हादसे के 1.12 करोड़ से अधिक कामकाजी घंटे (मैन-आवर) दर्ज किए गए हैं, जो कार्य की उच्च गुणवत्ता और सुरक्षात्मक प्रणाली का प्रमाण है। इस सुरंग की रूपरेखा 100 साल की उपयोगिता को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अंतिम छोर मिलने के बाद वेंटिलेशन, पानी की निकासी (ड्रेनेज) और सड़क को अंतिम रूप देने जैसे बचे हुए तकनीकी कार्यों में करीब ढाई से तीन साल की अवधि लग सकती है।

इस बीच, एक अन्य इंजीनियर हबीबुल्लाह राथर ने इस प्रोजेक्ट को बेहद जटिल बताते हुए कहा कि शून्य से 40 डिग्री नीचे की कड़कड़ाती ठंड और इस क्षेत्र के भीषण मौसम में काम को अंजाम देना एक अत्यंत कठिन परीक्षा थी। परियोजना की डेडलाइन के बारे में उन्होंने जानकारी दी कि संविदात्मक समझौते के मुताबिक इसे सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कई प्राकृतिक व तकनीकी अड़चनों की वजह से इसमें देरी हुई है। इसके मद्देनजर अब परियोजना को पूरा करने की संशोधित अवधि जुलाई 2028 तय की गई है।

गौरतलब है कि इस सुरंग का निर्माण जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग के पास बालटाल और लद्दाख के द्रास सेक्टर में मीनामार्ग के मध्य जोजिला दर्रे वाले इलाके में किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का ध्येय हिमालय के इस अत्यंत संवेदनशील और दुर्गम मार्ग पर हर मौसम में चलने वाली कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जो सर्दियों में भारी हिमपात और हिमस्खलन के कारण लंबे समय तक देश से अलग-थलग हो जाता है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर जमीनी काम की शुरुआत 1 अक्टूबर, 2020 को की गई थी।

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