भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोल में चो ह्यून के साथ की द्विपक्षीय समीक्षा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को सोल में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों के तमाम पहलुओं की व्यापक समीक्षा की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, जहाज निर्माण, उन्नत तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क (पी2पी) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर विशेष बल दिया। इसके साथ ही स्टार्टअप्स, वित्तीय तकनीक (फिनटेक) तथा वैश्विक मंचों पर संयुक्त भागीदारी के नए अवसरों को तलाशने पर भी गंभीर मंथन हुआ।
इस कूटनीतिक वार्ता के संपन्न होने के बाद भारतीय विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून के साथ हुई यह बैठक बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बातचीत का मुख्य एजेंडा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की हालिया भारत यात्रा के दौरान तय किए गए लक्ष्यों और परिणामों को आगे बढ़ाना था। दोनों देशों ने पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों और आर्थिक मंचों पर भी सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया है।
वहीं, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने पिछले वर्ष अप्रैल में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरे ने दोनों देशों के आपसी संबंधों को एक ऐतिहासिक ऊंचाई और नई गति प्रदान की है। उन्होंने जानकारी दी कि इस बैठक में दोनों पक्षों ने पिछले शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश और वित्तीय मोर्चे पर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को तेजी से धरातल पर उतारने की समीक्षा की है और इसे प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की कार्ययोजना पर चर्चा की है।
चो ह्यून ने सोशल मीडिया पर भारत सरकार के एक विशेष कदम की सराहना करते हुए लिखा कि भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस सप्ताह ‘कोरिया वीक’ का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस भरोसे को दर्शाती है, जिसमें उन्होंने भारतीय बाजार में काम कर रही दक्षिण कोरियाई कंपनियों की समस्याओं का त्वरित समाधान निकालने का वादा किया था। इस सहयोग के लिए भारत का धन्यवाद करते हुए उन्होंने घोषणा की कि दक्षिण कोरिया भी जल्द ही अपने देश में भारतीय व्यवसायों के लिए इसी प्रकार की एक राउंडटेबल बैठक की मेजबानी करेगा।
बैठक के बाद आयोजित दोपहर के भोजन (लंच) के दौरान दोनों नेताओं के बीच वैश्विक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कोरियाई विदेश मंत्री ने बताया कि मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के मौजूदा हालातों के कारण पैदा हो रहे वैश्विक आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए दोनों देश मिलकर रणनीतिक कदम उठाने पर सहमत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया निरंतर एक-दूसरे के संपर्क में बने रहेंगे।
अपनी शुरुआती टिप्पणी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोल आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हाल ही में संपन्न हुई राष्ट्रपति स्तर की यात्रा के बाद यह बैठक बेहद सही समय पर हुई है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों की अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने चो ह्यून के साथ अपनी पुरानी मुलाकातों को याद करते हुए बताया कि वे इससे पहले न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, कुआलालंपुर, जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के भारत दौरे के समय भी मिल चुके हैं।
जयशंकर ने अंत में इस बात पर जोर दिया कि अब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस रणनीतिक साझेदारी को एक आधुनिक और भविष्योन्मुखी रूप दें। इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों और आर्थिक क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक व्यवस्था में उन देशों का साथ आना बेहद आवश्यक है जिनकी विचारधारा, मूल्य और आपसी विश्वास एक समान हैं, और हाल के उच्च स्तरीय दौरों ने इस दिशा में एक स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया है।



