अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते का भारत ने किया स्वागत, एनएसए अजीत डोभाल बोले- इससे वैश्विक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा

रूस में आयोजित 16वें ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान मंगलवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया ज्ञापन समझौते (MoU) का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने इस घटनाक्रम को बेहद सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर अमन-चैन कायम करने में मदद मिलेगी।
ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि भारत वाशिंगटन और तेहरान के बीच हस्ताक्षरित इस समझौते को बड़ी उम्मीदों के साथ देख रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह पहल पूरी तरह सफल साबित होगी और इसके चलते वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को काफी मजबूती मिलेगी। डोभाल ने बेघर हुए लोगों के लिए सुरक्षित स्थान चुनने के फैसले को एक बेहतरीन कदम बताया। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रगति से आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आ रही बाधाएं समाप्त होंगी, जिससे उर्वरक और रसायन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बनी कमियां दूर की जा सकेंगी।
सुरक्षा और आर्थिक पहलुओं पर बात करते हुए एनएसए ने कहा कि इस समझौते के बाद संबंधित क्षेत्र और उससे आगे के देशों को समुद्री आवागमन की जो स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) मिलेगी, वह आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। इसी के साथ उन्होंने सदस्य देशों को आगाह भी किया कि सभी को भविष्य में उभरने वाले नए सुरक्षा खतरों और चुनौतियों के प्रति निरंतर सतर्क रहना होगा।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बीते 17 जून को दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए डिजिटल माध्यम से एक सहमति पत्र (MoU) पर दस्तखत किए थे। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत विवाद के अंतिम समाधान और नियमों पर चर्चा करने के उद्देश्य से संघर्षविराम (सीजफायर) को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
इस महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक कदम ने अमेरिका और ईरान के मध्य पिछले करीब चार महीनों से चले आ रहे सैन्य व राजनैतिक गतिरोध पर विराम लगा दिया है। अब दोनों देशों के पास तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य-पूर्व की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत बातचीत करने के लिए दो महीने का समय उपलब्ध है।
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी दोनों महाशक्तियों के बीच शत्रुता खत्म करने, क्षेत्र में स्थिरता लाने और व्यापारिक गतिविधियों को दोबारा बहाल करने वाले इस समझौते का समर्थन किया था। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया था कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने का एकमात्र जरिया सतत संवाद ही है। इसके जरिए ही होर्मुज जलडमरूमनध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही और वैश्विक व्यापार के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित किया जा सकता है। भारत ने हमेशा से ही तनाव को कम करने के लिए कूटनीति और बातचीत का पक्ष लिया है, जो वर्तमान विवादों के त्वरित समाधान के लिए बेहद जरूरी हैं।



