नशे के खिलाफ जंग बेहद निर्णायक मोड़ पर, राज्यों से सूचनाएं साझा करने और बैठकों को परिणाम-उन्मुख बनाने की अपील: अमित शाह

नारकोटिक्स कंट्रोल (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में देश को नशामुक्त बनाने के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल’ का विमोचन किया। अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग और अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर आयोजित इस बैठक में उन्होंने कहा कि भारत इस समय मादक पदार्थों के विरुद्ध अपनी लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण चरण में है और अगले तीन साल देश के लिए इस दिशा में बेहद निर्णायक साबित होंगे।
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 26 जून का दिन देश के इतिहास और वर्तमान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां देश नशे के समूल नाश का खाका तैयार कर रहा है, वहीं आज राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने वाले महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती भी है। उन्होंने कहा कि ‘बंकिम बाबू’ ने देश में गुलामी के अंधकार के बीच जन-जन में आत्मविश्वास का संचार किया और ‘वंदे मातरम’ जैसा अमर राष्ट्रगीत दिया। ब्रिटिश शासन के खिलाफ आजादी के आंदोलन में यह गीत संघर्ष का सबसे बड़ा संबल बना और देश के अनगिनत वीर सेनानियों ने फांसी के फंदे पर झूलते समय इसी मंत्र का उद्घोष किया था। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का प्रतीक है।
अमित शाह ने इस बात पर बल दिया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की समस्या को सिर्फ कानून-व्यवस्था के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि आगामी 100 साल के कालखंड के लिए देश के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से सभी राज्य सरकारों, सरकारी महकमों, संतों, युवाओं और महिला शक्ति को एकजुट होकर सामूहिक रूप से कार्य करना होगा, क्योंकि इस लड़ाई में समाज के हर वर्ग का योगदान अपरिहार्य है।
राज्यों के प्रशासनिक और पुलिस नेतृत्व को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने देश के सभी मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को निर्देशित किया कि वे एनसीओआरडी की बैठकों को केवल कागजी या औपचारिक कार्यवाही तक सीमित रखने के बजाय परिणाम-उन्मुख बनाएं। बैठकों में जो भी निर्णय लिए जाएं, उन्हें पूरी गंभीरता से लागू किया जाए और व्यवस्थागत कमियों को दूर करने के लिए नियमित रूप से कार्यों की समीक्षा की जानी चाहिए।
सूचना तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने रियल-टाइम सूचना साझाकरण की प्रणाली पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने इस उद्देश्य के लिए अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल विकसित किए हैं। उन्होंने सभी राज्यों से अपेक्षा की कि वे मादक पदार्थों की तस्करी और जब्ती से जुड़े सभी मामलों का डेटा इन पोर्टल्स पर तत्परता से दर्ज करें, ताकि केंद्रीय स्तर पर इसकी सटीक निगरानी हो सके और राज्यों को उचित परामर्श व फीडबैक दिया जा सके।
बदलते परिदृश्य का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में ड्रग्स तस्करों का नेटवर्क नई तकनीकों का सहारा लेकर अधिक चालाकी से काम कर रहा है, जिससे उनके खिलाफ अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को भी आधुनिक और एकीकृत रणनीति के साथ काम करना होगा। उन्होंने सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि अपराधियों के प्रति प्रशासन का रवैया अत्यंत कठोर होना चाहिए, जबकि नशे के जाल में फंसे पीड़ितों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करते हुए उनके उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें।
इस अवसर पर गृह मंत्री ने नशामुक्त भारत अभियान की सफलता को दर्शाने वाले तुलनात्मक आंकड़े भी पेश किए। उनके अनुसार, साल 2004 से 2014 के बीच देश में 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स पकड़े गए थे, जो साल 2014 से 2026 के बीच बढ़कर 1 करोड़ 18 लाख किलोग्राम हो गए। इसी तरह, पहले जहां जब्त किए गए मादक पदार्थों का मूल्य लगभग 40 हजार करोड़ रुपये था, वहीं पिछले 12 वर्षों (2014-2026) में यह राशि बढ़कर करीब 1 लाख 84 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा कि ये आंकड़े मादक पदार्थों के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई और प्रतिबद्धता के परिचायक हैं। सरकार इस अवैध व्यापार को किसी भी सूरत में सहन नहीं करेगी और आने वाले समय में इसे समाप्त करने के लिए और अधिक कड़े कदम उठाए जाएंगे।



