भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच: प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने का साझा किया विजन, पीएमओ आयोजित करेगा ‘जापान बिजनेस वीक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच में दोनों देशों के मध्य दीर्घकालिक और मजबूत आर्थिक गठजोड़ को और सशक्त करने का आह्वान किया। अपने आधिकारिक संबोधन के माध्यम से प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने जापानी निवेशकों को आश्वस्त किया कि भारत उनके लिए वैश्विक स्तर पर सबसे सुरक्षित और विकासशील बाजार है।

मंच को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सभी प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इस गरिमामयी मंच पर उपस्थित होना उनके लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने रेखांकित किया कि यहां मौजूद बहुसंख्यक जापानी कंपनियां बीते कई दशकों से भारत के औद्योगिक विकास की साक्षी रही हैं, जिनमें से कुछ तो सौ साल से भी अधिक समय से भारत की प्रगति में अपना योगदान दे रही हैं। उन्होंने मंच पर आए नए वैश्विक साझेदारों का अभिनंदन करते हुए उन्हें भारत-जापान के इस सफल और स्वर्णिम अध्याय से जुड़ने की शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने दोनों राष्ट्रों के संबंधों को अद्वितीय बताते हुए कहा कि हमारी आर्थिक भागीदारी के परिणाम बेहद शानदार रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ समय पहले ही हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के एक नए विनिर्माण केंद्र का उद्घाटन संपन्न हुआ है। आज की स्थिति यह है कि सुजुकी द्वारा दुनिया भर में उत्पादित की जाने वाली गाड़ियों का करीब दो-तिहाई भाग भारत में निर्मित होता है, जिसका निर्यात 100 से भी ज्यादा देशों को किया जा रहा है।

अपने संबोधन के बीच में ही प्रधानमंत्री मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची से संवाद करते हुए कहा कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि पीएम ताकाइची को मोटर बाइक का विशेष शौक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कावासाकी, यामाहा और होंडा जैसी कंपनियों के भारतीय संयंत्रों में बनने वाली मोटरसाइकिलें आज वैश्विक बाजारों की जरूरतें पूरी कर रही हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, चाहे एयर कंडीशनर का क्षेत्र हो, बिजली ग्रिड के उपकरण हों या चिकित्सा तकनीक; जब भी जापान की विशिष्ट कार्यकुशलता एवं पूंजी निवेश का समन्वय भारत के तीव्र क्रियान्वयन और विशाल पैमाने के साथ होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे वैश्विक समुदाय पर दिखाई देता है।

वैश्विक मंदी और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में विश्व अर्थव्यवस्था सप्लाई चेन की बाधाओं, अस्थिर व्यापार और घटती मांग जैसी प्रतिकूलताओं से मुकाबला कर रही है। उन्होंने कहा कि संकट के समय में ही दृढ़ इच्छाशक्ति वाले लोग दोगुनी मेहनत से कार्य करते हैं। भारत की आर्थिक प्रगति का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि भारत विश्व की सबसे तेजी से उभरती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) पिछले वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत आंकी गई है। विगत 12 वर्षों के दौरान किए गए निरंतर संरचनात्मक सुधारों के बल पर भारत ने अपनी आर्थिक नींव को अत्यंत सुदृढ़ किया है।

निवेशकों को आकर्षित करते हुए उन्होंने बताया कि विगत कुछ महीनों में भारत सरकार ने टैक्स प्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था और व्यापार सुगमता (इज ऑफ डूइंग बिजनेस) के दायरे में कई बड़े नीतिगत बदलाव किए हैं। निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए अर्थव्यवस्था के तमाम रास्ते खोल दिए गए हैं और विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम स्वरूप, जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के वार्षिक सर्वे में जापानी कॉरपोरेट्स के लिए भारत लगातार चौथे साल निवेश के लिए शीर्ष आकर्षक स्थान के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।

जापानी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि निकट भविष्य में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की देखरेख में एक विशेष “जापान बिजनेस वीक” का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी जापानी उद्योगपतियों के साथ सीधे टेबल पर बैठेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे और भारत में व्यावसायिक माहौल को और सुगम बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इस कदम से भारत में जापानी निवेश और आपसी भागीदारी को और अधिक विस्तार मिलने की उम्मीद है।

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