वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत-जापान की साझेदारी जरूरी, आपसी संबंधों में आएगा नया उछाल: पीएम ताकाइची

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात के बाद भारत-जापान के मैत्रीपूर्ण संबंधों को एक नई ऊंचाई देने की बात कही है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में हिस्सा लेने के बाद, उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दोनों देशों के बीच बना मजबूत भरोसा ही इस साझेदारी का मुख्य आधार है। उन्होंने रेखांकित किया कि आगामी वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है, और इस अवसर से पूर्व आपसी रिश्तों को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

जापानी प्रधानमंत्री ने औपचारिक बैठकों से इतर हुए इस रात्रिभोज के खुशनुमा माहौल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि एक बेहद तनावमुक्त वातावरण में दोनों नेताओं को न केवल वैश्विक परिदृश्य और पारस्परिक संबंधों पर बात करने का मौका मिला, बल्कि दोनों देशों के खान-पान, रहन-सहन और संस्कृति जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने माना कि इस तरह के अनौपचारिक विमर्श से दोनों देशों के नेतृत्व के बीच व्यक्तिगत समझ और आपसी तालमेल को और बल मिला है।

भारत के शानदार आतिथ्य से अभिभूत होकर पीएम ताकाइची ने देश की गौरवशाली भोजन परंपरा की तारीफ की। उन्होंने इस खास और सम्मानजनक आवभगत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी कूटनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पूर्व, नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता आयोजित की गई थी। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में बोलते हुए ताकाइची ने वर्तमान विश्व की अस्थिर परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती चुनौतियों के बीच यह बेहद जरूरी हो गया है कि भारत और जापान अपनी-अपनी कूटनीतिक और आर्थिक ताकतों का सदुपयोग करते हुए एक-दूसरे के पूरक बनें और साझी समृद्धि की ओर कदम बढ़ाएं।

प्रेस वार्ता में उन्होंने भारत दौरे पर मिले स्नेह का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपनी ‘छोटी बहन’ के रूप में संबोधित किया, तो यह उनके लिए एक अत्यंत सुखद और आत्मीय अनुभव था। उन्होंने कहा कि भारत और जापान की सोच में एक अद्भुत समानता है और दोनों देश भाई-बहन की तरह अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प रखते हैं। अस्थिर वैश्विक माहौल में एक-दूसरे का साथ देना अब समय की मांग बन चुका है।

जापानी प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस शिखर वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच विभिन्न द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बेहद सार्थक बातचीत हुई है। इस चर्चा के दौरान दोनों देशों ने अपने समान हितों और लक्ष्यों को फिर से दोहराया। अपने सहयोग को और अधिक व्यावहारिक रूप देने के लिए दोनों नेताओं ने आपसी समन्वय के लिए तीन मुख्य क्षेत्रों का चयन किया है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देंगे।

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