एमएसएमई मंत्रालय की एनएसएसएच योजना से एससी-एसटी उद्यमियों को मिल रहा बढ़ावा, ‘बिजनेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम’ से कारोबार का हो रहा विस्तार

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति हब (एनएसएसएच) योजना देश के वंचित वर्गों के उद्यमियों को प्रगति के नए अवसर प्रदान कर रही है। इस योजना के अंतर्गत शुरू किया गया ‘बिजनेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम’ (बीएपी) उचित मार्गदर्शन, उद्योग जगत की बारीक समझ और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से उद्यमियों के व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। इसके जरिए इन वर्गों के उद्यमियों के लिए न केवल अपने व्यवसाय का दायरा बढ़ाना मुमकिन हुआ है, बल्कि बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता और सरकारी खरीद (जेम पोर्टल आदि) में उनकी हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है।
इस विशेष पहल का मुख्य फोकस उन बुनियादी अड़चनों को दूर करना है, जो प्रायः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कारोबारियों के सामने आती हैं। इनमें वित्तीय संसाधनों की कमी, आधुनिक तकनीक तक पहुंच न होना, बाजार की सीमित समझ और संस्थागत नेटवर्क का अभाव शामिल हैं। इन चुनौतियों का समाधान करके यह योजना सार्वजनिक निविदाओं (टेंडर्स) में इन उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित कर रही है, जिससे वे देश की मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनकर दीर्घकालिक और स्थायी विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) के क्षेत्र में भी इस योजना के तहत व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कारोबारियों को वित्तीय प्रबंधन, सरकारी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने के नियम, सही मूल्य निर्धारण की नीतियां और कानूनी व नियामकीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इस प्रकार के कौशल विकास से उद्यमियों का मनोबल बढ़ा है, जिससे वे संगठित एवं नियमों के तहत चलने वाले बड़े बाजारों में अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी जगह बना रहे हैं।
बिजनेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (बीएपी) मुख्य रूप से परिचालन दक्षता, रणनीतिक योजना और बाजार विस्तार की बाधाओं को दूर करने में मददगार साबित हो रहा है। इसके सहयोग से कई उद्यमियों ने अपने पुराने ढर्रे के कामकाज को छोड़कर डेटा-आधारित आधुनिक व्यावसायिक रणनीतियों को अपनाया है, जिसके कारण उन्हें सरकारी और बड़े कॉरपोरेट क्षेत्रों में बड़े ऑर्डर हासिल करने में सफलता मिली है।
इस कार्यक्रम के सफल परिणामों के रूप में पश्चिम बंगाल की कंपनी ‘मेसर्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी इंजीनियरिंग’ का उदाहरण सामने आया है, जिसके संस्थापक देबासिस मंडल ने बीएपी की मदद से लागत प्रबंधन और सटीक मूल्य निर्धारण की कला सीखी। इस समझ के बल पर उनकी कंपनी ने सरकारी खरीद प्रक्रिया में हिस्सा लेकर पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से 8.48 लाख रुपये का बड़ा टेंडर प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की।
इसी तरह असम की ‘मेसर्स रेनेर्जी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ ने भी इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने आंतरिक कामकाज को पूरी तरह पेशेवर और बाजार की मांग के अनुकूल ढाला है। इसके चलते सरकारी खरीद के मंच पर कंपनी की सक्रियता काफी बढ़ गई है और वह अब सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह सक्षम हो चुकी है।
महाराष्ट्र के नासिक की बात करें तो वहां के ‘सावलराम एंटरप्राइजेज’ के संस्थापक सुनील पोपटराव जगताप ने आईआईएम शिलांग द्वारा आयोजित बीएपी सत्र में हिस्सा लिया था। वहां से व्यावसायिक रणनीतियों और सरकारी निविदाओं की बारीकियां सीखने के बाद उनकी कंपनी को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) से हाइड्रोलिक सिलेंडर की आपूर्ति के लिए 5.10 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जिससे उनके कारोबार को एक नई गति मिली है।
एमएसएमई मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि एनएसएसएच योजना केवल व्यक्तिगत स्तर पर व्यापार को मजबूत नहीं कर रही, बल्कि देश में समावेशी आर्थिक विकास का एक नया ढांचा भी तैयार कर रही है। सही दिशा में दिए जा रहे मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और रणनीतिक सहयोग के बल पर यह योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के होनहार उद्यमियों को वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी भागीदार के रूप में तैयार कर रही है।



