कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की मानसून और सूखा प्रबंधन की समीक्षा; आपातकालीन योजनाओं को लागू करने के आदेश

देश में मानसून की धीमी रफ्तार और खरीफ फसलों पर इसके प्रभाव को देखते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में मुख्य रूप से एल नीनो के असर, देश भर में वर्षा की कमी वाले जिलों की स्थिति, बीज-उर्वरक की उपलब्धता और खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने विभाग के उच्च अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि एल नीनो के प्रभावों की निरंतर निगरानी की जाए और राज्यों के सहयोग से आपातकालीन कृषि योजनाओं (कॉन्टिंजेंसी प्लान) को पूरी तत्परता से लागू किया जाए।
बैठक के दौरान देश के मौसम संबंधी संकट का विवरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने 262 ऐसे जिलों को चिन्हित किया है जो वर्षा की कमी के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से 52 जिलों में पिछले दिनों में कुछ वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन 210 जिले अब भी सूखे के संकट से जूझ रहे हैं। इन प्रभावित क्षेत्रों में से 8 जिले ऐसे हैं जहां मानसून की बारिश शून्य या बेहद नगण्य रही है। कृषि मंत्री ने इन सभी जिलों के लिए विशेष रणनीति बनाकर जिला स्तरीय कॉन्टिंजेंसी प्लान को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
मानसून की चाल पर चर्चा करते हुए बैठक में मौसम विभाग के हवाले से बताया गया कि 2 जुलाई से सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ के चलते आगामी दो-तीन दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के इलाकों में मानसून आगे बढ़ेगा। हालांकि, इस पूरे सीजन में देश के भीतर कुल वर्षा सामान्य से कम रहने का ही अनुमान है। मंत्री चौहान ने चिंता जताते हुए कहा कि उत्तरी गुजरात के कई इलाकों में पानी की कमी बनी हुई है, और महाराष्ट्र में बारिश होने के बाद भी जलाशयों का स्तर गिर रहा है। यदि आने वाले दिनों में मानसून में लंबा गैप आता है तो कृषि क्षेत्र के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
स्थिति से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे जल्द ही सबसे अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक आवश्यक बैठक करेंगे, जिसमें सूखा प्रबंधन की तैयारियों और कॉन्टिंजेंसी प्लान की प्रगति को परखा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संकट की इस घड़ी में किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के वितरण और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कवरेज को युद्धस्तर पर बढ़ाया जाए।
जलाशयों की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करते हुए अधिकारियों ने बताया कि देश के 166 बड़े जलाशयों में जल स्तर पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम दर्ज किया गया है, जबकि जमीनी जल स्तर (भूजल) अभी नियंत्रण में है। सूखे के खतरों को भांपने के लिए गठित फसल मौसम निगरानी समूह साप्ताहिक बैठकों के जरिए हालात पर नजर रख रहा है और इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए 15 राज्यों ने अपने नोडल अफसर तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही, आईसीएआर (ICAR) और क्रिडा (CRIDA) की तैयारियों की समीक्षा की गई और सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को आपातकालीन कृषि उपायों को लागू करने के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है।
कृषि इनपुट की उपलब्धता पर संतोष व्यक्त करते हुए बैठक में बताया गया कि देश में बीजों और खादों की कोई कमी नहीं है। राष्ट्रीय बीज निगम के पास बीजों का पर्याप्त स्टॉक है, वहीं अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के लिए 176.13 एलएमटी उर्वरक की मांग के विपरीत देश में 286.37 एलएमटी उर्वरक की उपलब्धता रही है। केंद्रीय मंत्री ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी खादों की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। इस दौरान दलहन, तिलहन, कपास मिशन के साथ-साथ आवश्यक खाद्यान्नों के बफर स्टॉक की भी पड़ताल की गई।
बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय कृषि ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है और यह साल काफी सफल रहा है। उन्होंने कहा कि मौसम की प्रतिकूलताओं के बावजूद हमें कृषि विकास और किसानों की भलाई के कार्यों को रुकने नहीं देना है। उन्होंने कृषि ऋण के सरलीकरण और आपातकालीन योजनाओं की चौबीसों घंटे निगरानी करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।



