कृषि और पशुपालन के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव; ग्वालियर में 13 करोड़ की हाईटेक नर्सरी का भूमिपूजन

सोमवार को ग्वालियर संभाग के प्रगतिशील किसानों के साथ संवाद करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य को कृषि और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का खाका प्रस्तुत किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित उन्नत कृषि कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पारंपरिक खेती के भरोसे किसानों की आय दोगुनी नहीं की जा सकती, इसके लिए पशुपालन और बहु-फसलीय दृष्टिकोण आवश्यक है। मध्य प्रदेश को आगामी पांच वर्षों में दुग्ध उत्पादन में देश का नंबर वन राज्य बनाने का संकल्प दोहराते हुए उन्होंने कहा कि सांची और ग्वालियर दुग्ध संघों को सुदृढ़ किया जा रहा है।

प्रशासनिक और राजनीतिक गरिमा के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खुरैरी और ग्राम जहांगीरपुर के लिए 13 करोड़ रुपये की लागत वाली हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन के प्रथम चरण का शिलान्यास किया। कार्यक्रम मंच पर कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित कई स्थानीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष और संभाग के वरिष्ठ सैन्य व पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत किसानों को सब्सिडी और सहायता राशि के हितलाभ सौंपे।

सिंचाई क्षमता के ऐतिहासिक विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दशकों में मध्य प्रदेश ने साढ़े 7 लाख हेक्टेयर से 50 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र का सफर तय किया है, जिसे अब बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने चंबल-पार्वती-कालीसिंध तथा केन-बेतवा लिंक परियोजनाओं को इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का आधार बताया। आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत देते हुए डॉ. यादव ने साझा किया कि अब किसानों को 31 मार्च तक हर हाल में ऋण चुकाने के दबाव से मुक्त कर दिया गया है; सरकार अब उन्हें वित्तीय वर्ष में अपनी सुविधानुसार ऋण चुकाने के लिए पूरे 12 महीने का समय दे रही है।

पशुधन प्रबंधन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नगरीय निकायों में बेसहारा गोवंश के लिए पुरानी दंडात्मक खिड़क प्रणाली बंद कर दी गई है। अब इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और भोपाल में ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला के मॉडल पर वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। कार्यशाला में उपस्थित वैज्ञानिक पद्धति से प्राकृतिक खेती करने वाले कृषक प्राण सिंह माथुर ने अपने पेटेंटेड अमरूदों की किस्मों के बारे में बताया, वहीं कृषक बृजेन्द्र रावत और देवराज कुशवाह ने भी रासायनिक खाद मुक्त खेती के लाभों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

इस दौरे के दौरान, मुख्यमंत्री ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एकीकृत और बहु-स्तरीय कृषि मॉडलों का उद्घाटन किया, जो कम लागत में अधिक मुनाफे की तकनीक पर आधारित हैं। विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला के अनुसार यह मॉडल किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आम के पौधे का रोपण किया तथा सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थानीय नागरिकों को हेलमेट वितरित किए।

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