भू-राजनीतिक संकट से सर्राफा बाजार सुस्त

बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान घरेलू और वैश्विक सर्राफा बाजारों में गिरावट का रुख देखने को मिला, जिससे सोने-चांदी के भाव करीब 0.7 प्रतिशत तक नीचे आ गए। इस मंदी की मुख्य वजह अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में पैदा हुआ नया सुरक्षा संकट है। जहां एक तरफ दोनों कीमती धातुओं में बिकवाली हावी रही, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 2.5 प्रतिशत से अधिक का जोरदार उछाल दर्ज किया गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, आगामी 5 अगस्त 2026 के सोने के वायदा अनुबंध की शुरुआत आज सुस्त रही। यह अपने पिछले क्लोजिंग प्राइस 1,45,392 रुपये से 192 रुपये नीचे खिसककर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ओपन हुआ। सुबह 10 बजे के सत्र तक बाजार में बिकवाली का दायरा और बढ़ा, जिससे यह 0.28 फीसदी या 414 रुपये की शुद्ध गिरावट के साथ 1,44,978 रुपये पर आ गया। आज के कारोबार के दौरान सोने ने ऊपरी स्तर पर 1,45,356 रुपये और निचले स्तर पर 1,44,800 रुपये की सीमा को छुआ।

चांदी के बाजार में भी आज कमोबेश ऐसा ही रुख देखने को मिला, जहां खरीदार दूरी बनाते दिखे। एमसीएक्स पर 4 सितंबर 2026 की डिलीवरी वाला चांदी का कॉन्ट्रैक्ट पिछले बंद भाव 2,30,857 रुपये के मुकाबले 842 रुपये के नुकसान के साथ 2,30,015 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला। थोड़ी ही देर में यह गिरावट बढ़कर 1,552 रुपये (0.67 प्रतिशत) हो गई, जिसके बाद चांदी का हाजिर जैसा वायदा भाव घटकर 2,29,305 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया।

वैश्विक जिंस बाजार कॉमेक्स पर भी आज भारतीय समय के अनुसार मंदी का माहौल हावी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.43 प्रतिशत टूटकर 4,139 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया, जबकि चांदी के अंतरराष्ट्रीय भाव में भी 0.54 प्रतिशत की कमी आई और यह 61 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। वैश्विक स्तर पर आई इस गिरावट का सीधा असर भारतीय वायदा बाजारों के सेंटिमेंट पर देखने को मिल रहा है।

इस आर्थिक उथल-पुथल की असल वजह वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता टकराव है, जिसमें अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंधात्मक कदम उठाते हुए उसके तेल बिक्री लाइसेंस को निरस्त कर दिया है और सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सैन्य कमान की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तेल टैंकरों (जहाजों) पर हुए हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इस कदम से क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो गई है।

सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने के डर से कच्चे तेल के बाजारों में तेजी आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का सौदा 2.5 फीसदी की मजबूती के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं, अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) भी 2.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा लागत बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button