खिलाड़ियों के लिए खेल चिकित्सा और पुनर्वास की नई राह: SAI और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर में हुआ करार

देश के प्रतिभावान खिलाड़ियों और उनके सपोर्ट स्टाफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के संकल्प के साथ शुक्रवार को भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (SIC) ने एक साझीदारी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू को स्वास्थ्य विभाग की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव तथा खेल विभाग के सचिव हरि रंजन राव की मौजूदगी में अंतिम रूप दिया गया। इस संयुक्त प्रयास का सीधा लक्ष्य एथलीटों को खेल के दौरान लगने वाली चोटों से सुरक्षित रखना, उनका आधुनिक उपचार करना और खेल विज्ञान के माध्यम से उनकी शारीरिक दक्षता को बढ़ाना है।

इस साझेदारी के माध्यम से दोनों प्रमुख संस्थान अपने-अपने संसाधनों का समन्वय करेंगे। स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर की उच्चस्तरीय चिकित्सीय विशेषज्ञता और साई (SAI) के विस्तृत एथलीट सहायता तंत्र को मिलाकर एक एकीकृत चिकित्सा मॉडल तैयार किया जा रहा है। यह ढांचा चोटों की शुरुआती पहचान, उनके वैज्ञानिक इलाज और खिलाड़ियों की मैदान पर जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी के लिए प्रभावी पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) सुनिश्चित करेगा, जिससे खिलाड़ियों का करियर लंबा और सुरक्षित हो सके।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह गठबंधन अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान देगा। दोनों ही संगठन स्पोर्ट्स मेडिसिन और खेल विज्ञान के क्षेत्र में अकादमिक शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्षमता विस्तार के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। नए वैज्ञानिक आविष्कारों को बढ़ावा देने और चोटों से बचाव के आधुनिक तौर-तरीकों को समझने के लिए मिलकर रिसर्च प्रोजेक्ट्स चलाए जाएंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस ऐतिहासिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और खेल विभागों का यह आपसी तालमेल देश की खेल यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वास्थ्य मंत्रालय स्पोर्ट्स मेडिसिन के क्षेत्र में पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर की शिक्षा को सुदृढ़ करने और नए विशेषज्ञों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आवश्यकतानुसार खिलाड़ियों के विशेष स्वास्थ्य प्रबंधन हेतु निमहंस जैसे शीर्ष चिकित्सा संस्थानों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाने की बात कही।

स्वास्थ्य सचिव ने देश के नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (AIIMS) में भी विशेष स्पोर्ट्स मेडिसिन इकाइयां स्थापित करने पर बल दिया ताकि खिलाड़ियों को त्वरित और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा मिल सके। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे अनुसंधान क्षेत्रों को चिह्नित करने को कहा जो सीधे तौर पर खिलाड़ियों के मैदान पर प्रदर्शन को बेहतर बनाने और भारत में खेल चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक बनाने में सहायक हों।

इस विषय पर खेल सचिव हरि रंजन राव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वर्तमान में देश में अपनाए जाने वाले अधिकतर खेल चिकित्सा प्रोटोकॉल और मानक विदेशी आंकड़ों पर आधारित हैं, जो भारतीय एथलीटों की वास्तविक शारीरिक आवश्यकताओं के पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने देश के अपने वैज्ञानिक साक्ष्य और प्रोटोकॉल तैयार करने की मांग की, जिससे खिलाड़ियों की चोटों को ठीक करने और उनके खेल को निखारने में बेहतर नतीजे मिल सकें।

अंत में, खेल सचिव ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा महाविद्यालयों और खेल केंद्रों के बीच एक मजबूत नेटवर्क स्थापित होना चाहिए। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय केंद्रों को स्थानीय मेडिकल कॉलेजों के साथ जोड़ने का आग्रह किया, ताकि देश के कोने-कोने में खेल रहे एथलीटों को त्वरित विशेषज्ञ परामर्श, वैज्ञानिक अनुसंधान और उन्नत प्रशिक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने इस समझौते को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भारतीय खेलों के विकास के लिए एक आवश्यक कदम बताया।

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