केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला: 1.27 लाख करोड़ रुपए की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना मंजूर, छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा काम

भारत को तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 1,27,500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सेमीकॉन 1.0 के तहत मिले सकारात्मक परिणामों को निरंतरता देने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक मजबूत पहचान बना सकेगा और उद्योग जगत को एक दीर्घकालिक नीतिगत सहारा मिलेगा।

सेमीकॉन 2.0 के तहत पूरे इकोसिस्टम को छह प्राथमिक स्तंभों के इर्द-गिर्द विकसित करने की रणनीति बनाई गई है। इन स्तंभों में चिप का खाका तैयार करना (चिप डिजाइन), उपकरणों एवं सामग्रियों का उत्पादन बढ़ाना, अधिक संख्या में फैब फैक्ट्रियों की स्थापना करना और एटीएमपी/ओएसएटी क्षेत्र को उन्नत बनाना शामिल है। इसके साथ ही शोध एवं विकास (आरएंडडी) तथा उच्च स्तर के मानव संसाधन (टैलेंट पूल) को तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे देश में कोर टेक्नोलॉजी और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) का विकास हो सके।

इस नीति के तहत चिप निर्माण के शुरुआती चरण से लेकर अंतिम उत्पादन तक हर स्तर पर सहयोग दिया जाएगा। चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में कार्यरत नए स्टार्टअप्स और उद्योगों को वित्तीय सहायता दी जाएगी, वहीं निर्माण प्रक्रिया के लिए जरूरी गैसों, रसायनों और मशीनों के स्वदेशी विकास पर रिसर्च होगी। देश में सिलिकॉन फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब जैसी नई फैक्ट्रियों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

योजना का एक मुख्य हिस्सा उन्नत पैकेजिंग और परीक्षण सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि विदेशी कंपनियां भारत को एटीएमपी/ओएसएटी के एक बड़े हब के रूप में देखें। रिसर्च को 28 एनएम-110 एनएम नोड के दायरे से बाहर ले जाकर और ज्यादा एडवांस तकनीकों पर केंद्रित किया जाएगा। कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए 315 भारतीय विश्वविद्यालयों में चल रहे चिप डिजाइनिंग पाठ्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा, जहां पहले ही 68,000 के करीब छात्रों को इंडस्ट्री-स्टैंडर्ड ईडीए टूल्स का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इस योजना के दूरगामी परिणामों को रेखांकित करते हुए सरकार ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा, लॉजिस्टिक्स व सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगा। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तकनीकों में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी को बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

इससे पहले क्रियान्वित की गई सेमीकॉन 1.0 योजना के तहत अब तक कुल 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों वाली 12 निर्माण इकाइयों को स्वीकृत किया जा चुका है। इस सूची में एक सिलिकॉन फैब, एक एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब और नौ पैकेजिंग प्लांट शामिल हैं। इनमें से केन्स, माइक्रोन और सीजी सेमी ने अपना कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य संयंत्र में वर्ष 2026 से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।

देश में इनोवेशन के माहौल को बढ़ावा देने के लिए सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत 24 डिजाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता पहुंचाई गई है। इसके अलावा 105 स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों (एमएसएमई) को आधुनिक ईडीए टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में ये कंपनियां ड्रोन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन्स, सुरक्षा कैमरों, आईओटी, एआई, टेलीकॉम गियर्स और स्मार्ट मीटर जैसे समकालीन क्षेत्रों के लिए चिप्स और सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) का विकास कर रही हैं।

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