ऐतिहासिक आर्थिक साझेदारी: भारत-ब्रिटेन सीईटीए प्रभावी, घरेलू मैन्युफैक्चरर्स और सर्विस सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से अमल में आ गया है। इस बड़े कदम से भारतीय कपड़ा, आभूषण, चमड़ा, केमिकल और समुद्री खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को ब्रिटिश बाजारों में कारोबार बढ़ाने के नए व व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।
केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में संपन्न हुआ यह समझौता भारत-यूके संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि इस समझौते के माध्यम से भारत से ब्रिटेन जाने वाले करीब 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य-शुल्क पहुंच प्राप्त हो रही है, जिससे भारत का 100 प्रतिशत व्यापार मूल्य सुरक्षित और कवर्ड हो जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि इस मुक्त व्यापार समझौते से न केवल टेक्सटाइल, लेदर, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामान के विनिर्माताओं को फायदा होगा, बल्कि एमएसएमई सेक्टर, कृषकों, प्रोसेस्ड फूड और समुद्री उत्पाद उद्योग को भी विदेशी बाजार में नई पहचान मिलेगी। गोयल ने आगे कहा कि यह डील भारत के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी), प्रोफेशनल सर्विसेज, एजुकेशन, फाइनेंशियल और बिजनेस सर्विस सेक्टर्स के लिए उन्नति के रास्ते तैयार करने के साथ-साथ भारतीय प्रतिभाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवागमन के मौके बढ़ाएगी।
सामाजिक सुरक्षा नियमों में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि यूके में अल्पकालिक अवधि के लिए काम करने वाले भारतीय प्रोफेशन्स को अब पांच साल तक दोहरी सामाजिक सुरक्षा में योगदान देने की आवश्यकता नहीं होगी, जो हमारी मैनपावर को वैश्विक मंच पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। उन्होंने इस ऐतिहासिक डील को अमलीजामा पहनाने में सहयोग के लिए ब्रिटेन के मंत्री पीटर काइल और दोनों पक्षों की वार्ता टीमों की भूमिका की सराहना की।
इस व्यापारिक संधि के प्रावधानों के तहत ब्रिटेन से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों जैसे स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स पर लगने वाले सीमा शुल्क में कटौती का सिलसिला शुरू हो जाएगा। हालांकि, कई उत्पादों के लिए यह रियायत एकमुश्त न होकर आने वाले समय में क्रमिक रूप से लागू की जाएगी।
यह समझौता दोनों पक्षों के बीच 14 चक्रों की मैराथन बैठकें आयोजित होने के बाद पिछले वर्ष 24 जुलाई, 2025 को हस्ताक्षरित किया गया था। इस व्यापक दस्तावेज में कुल 30 चैप्टर शामिल हैं, जो गुड्स एंड सर्विसेज, डिजिटल कॉमर्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और सरकारी खरीद जैसे बहुआयामी क्षेत्रों को कवर करते हैं। समझौते की शर्तों के अनुसार, भारत अपनी 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर लगने वाले टैक्स को कम या खत्म करने की दिशा में बढ़ेगा, जिसमें से 85 प्रतिशत लाइनों को अगले 10 वर्षों में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री कर दिया जाएगा। इसके तहत ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क तत्काल प्रभाव से 150% से घटकर 75% हो जाएगा, जिसे एक दशक में 40% पर लाया जाएगा, जबकि ब्रिटिश वाहनों (ऑटोमोबाइल) पर आयात शुल्क को कोटा आधारित प्रणाली के माध्यम से धीरे-धीरे घटाया जाएगा।



