अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास रचने को तैयार ‘विक्रम-1’, प्रधानमंत्री मोदी ने स्काईरूट टीम की सराहना करते हुए बताया युवाओं की प्रतिभा का प्रतीक

देश के पहले निजी कक्षीय प्रक्षेपण यान ‘विक्रम-1’ के प्रक्षेपण से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रगति का एक ऐतिहासिक और गौरवशाली चरण बताया है। शनिवार सुबह स्काईरूट एयरोस्पेस के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना भारत के युवाओं की तकनीकी क्षमता, नवीन सोच और व्यापारिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है, जिससे नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से देश को सूचित किया कि स्काईरूट एयरोस्पेस शनिवार सुबह 11:30 बजे देश के पहले निजी तौर पर विकसित कक्षीय रॉकेट ‘विक्रम-1’ का पहला परीक्षण प्रक्षेपण करने जा रहा है। उन्होंने इस यान की कार्यक्षमता के बारे में बताते हुए कहा कि चार चरणों में काम करने वाला यह रॉकेट त्वरित और मांग-आधारित प्रक्षेपण सेवाएं मुहैया कराने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

स्पेस सेक्टर में हुए हालिया सुधारों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं के मजबूत इरादों और उद्यमशीलता की भावना को दर्शाता है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में लागू किए गए नए नीतिगत सुधारों की वजह से ही आज निजी उद्यमों और नवाचार के लिए अनुकूल मार्ग प्रशस्त हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘विक्रम-1’ सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और देश में अनुसंधान की एक नई लहर पैदा करेगा।

पीएम मोदी ने देशवासियों और खासकर युवा वर्ग का आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियान के सजीव प्रसारण को देखें और इस बड़ी उपलब्धि का हिस्सा बनें। उन्होंने नागरिकों से यह भी अनुरोध किया कि वे डिजिटल मंचों पर ‘IndiaWithVikram1’ का उपयोग करके स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई संदेश भेजकर उनका हौसला बढ़ाएं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘विक्रम-1’ भारत में निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित पहला ऐसा रॉकेट है जो उपग्रहों को अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता रखता है। इस प्रक्षेपण यान के ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में अत्याधुनिक 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन लगाया गया है, जो भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में किसी भी कक्षीय यान में इस तकनीक के पहले प्रयोग को दर्शाता है।

इस पूरे अभियान को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है, जो स्काईरूट एयरोस्पेस की पहली कक्षीय परीक्षण उड़ान है। भारत की किसी भी निजी कंपनी के लिए अपने स्वयं के रॉकेट से पृथ्वी की निचली कक्षा तक पहुंचने की दिशा में यह पहला बड़ा कदम है, जिसे घरेलू अंतरिक्ष उद्योग के विकास में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

इस अंतरिक्ष यात्रा के दौरान यान के साथ कुछ बेहद खास पेलोड भी भेजे जा रहे हैं। इसमें सोने से निर्मित एक छोटा कलात्मक रॉकेट शामिल है, जिसके भीतर देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों डॉ. विक्रम साराभाई, सर सीवी रमन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की बेहद सूक्ष्म मूर्तियां रखी गई हैं। इसके साथ ही प्रयोगशाला में तैयार किया गया ‘कॉस्मिक ब्लूम’ नामक हीरा भी इस मिशन में भेजा जा रहा है। इस ऐतिहासिक उड़ान में प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं, ‘वंदे मातरम’ का संदेश और वैश्विक समर्थकों के संदेशों से युक्त एक विशेष कार्ड भी स्पेस में भेजा जा रहा है।

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