कोयला गैसीकरण योजना: प्री-बिड बैठक में उमड़े निवेशक, 3 लाख करोड़ तक के निवेश और 50 हजार नौकरियों की उम्मीद

देश में कोयले के आधुनिक और मूल्य-संवर्धित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कोयला मंत्रालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्री-बिड सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें सरकारी उपक्रमों और निजी क्षेत्र के दिग्गजों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। अपर सचिव सानोज कुमार झा के नेतृत्व में हुई इस बैठक में 37,500 करोड़ रुपए की सतही कोयला व लिग्नाइट गैसीकरण योजना की प्रगति और कार्यान्वयन रणनीति पर चर्चा हुई।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य उद्योग जगत को योजना के नियमों और आवेदन प्रक्रिया से अवगत कराना था। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) के तहत पात्रता नियमों, मूल्यांकन पद्धति और मिलने वाली वित्तीय सहायता की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में आए संभावित आवेदकों के सवालों के भी संतोषजनक उत्तर दिए गए।
यह योजना 13 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत की गई थी, जिसका लक्ष्य पारंपरिक कोयले से मेथनॉल, अमोनिया, सिंथेटिक गैस और DRI जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पाद तैयार करना है। यह कदम पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों के निर्माण और औद्योगिक इस्तेमाल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पहल से देश के आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। मंत्रालय के अनुसार, योजना से 2.5 लाख से 3 लाख करोड़ रुपए का नया निवेश आएगा और प्रतिवर्ष 7.5 करोड़ टन कोयले की खपत होगी। इसके अतिरिक्त, इससे 50,000 प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे तथा विदेशी रसायनों व ईंधन के आयात में उल्लेखनीय कमी आएगी।
अंतिम चरण की प्रक्रिया शुरू करते हुए कोयला मंत्रालय ने इच्छुक कंपनियों को 7 सितंबर 2026 तक अपने प्रस्ताव जमा करने को कहा है। पात्र संस्थाओं से निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने आवेदन पूरे करने का आग्रह किया गया है।



